DFS सचिव संजय लोहिया ने बैंकों से लोन प्रोसेसिंग को पूरी तरह डिजिटल बनाने के निर्देश दिए हैं। इस कदम का लक्ष्य छोटे व्यवसायों और रिटेल ग्राहकों तक तेजी से क्रेडिट पहुंचाना और फाइनेंशियल इंक्लूजन को बढ़ावा देना है।
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लोन प्रोसेसिंग को एंड-टू-एंड डिजिटल मोड पर शिफ्ट करें। 6 अक्टूबर, 2026 को हुई एक समीक्षा बैठक में सचिव संजय लोहिया ने साफ किया कि अब मैन्युअल पेपरवर्क की जगह पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम को अपनाना होगा, ताकि आम आदमी और छोटे कारोबारियों को कर्ज आसानी से मिल सके।
बैंकों के लिए चुनौती और अवसर
सरकार का यह फैसला बैंकिंग सेक्टर को मॉडर्न बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, पूरी तरह से ऑटोमेटेड मॉडल अपनाने के लिए बैंकों को अपने IT इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सिक्योरिटी पर भारी निवेश करना होगा। निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तकनीकी बदलाव का बैंकों के ऑपरेटिंग मार्जिन और खर्चों पर क्या असर पड़ता है।
UPI और क्रेडिट का नया दौर
DFS ने बैंकों को UPI-बेस्ड क्रेडिट लाइन्स और माइक्रो-एंटरप्राइजेज के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है। सरकार का मकसद रूरल एरिया तक वर्किंग कैपिटल की पहुंच बढ़ाना है। साथ ही, 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' और 'प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना' की शिकायतों के निपटारे के लिए एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल बनाने की बात कही गई है ताकि क्लेम जल्दी सेटल हो सकें।
साइबर सिक्योरिटी की बढ़ती चिंताएं
तेजी से हो रहे इस डिजिटलाइजेशन के साथ साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी एक अहम चुनौती बनकर उभरेगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कड़े मानकों का पालन करना बैंकों के लिए अनिवार्य होगा। साथ ही, 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर, 2026 तक चलने वाले 'फाइनेंशियल इंक्लूजन सैचुरेशन कैंपेन' के जरिए बैंक उन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करेंगे जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी विकसित हो रहा है।
