UPI Merchant Fee: UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क की आहट से सहमे D2C ब्रांड और ब्रोकर्स

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AuthorAditya Rao|Published at:
UPI Merchant Fee: UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क की आहट से सहमे D2C ब्रांड और ब्रोकर्स

UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के सरकारी प्रस्ताव का इंडस्ट्री ने कड़ा विरोध किया है। D2C ब्रांड्स और स्टॉक ब्रोकर्स का कहना है कि यह कदम उनके प्रॉफिट मार्जिन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

मार्जिन पर भारी दबाव की आशंका

भारत में UPI की सफलता की सबसे बड़ी वजह इसका 'जीरो-फी' मॉडल रहा है, लेकिन अब सरकारी स्तर पर कॉस्ट-रिकवरी फ्रेमवर्क पर चर्चा छिड़ गई है। D2C ब्रांड्स, जो पहले से ही बेहद कम मार्जिन पर काम करते हैं, इस प्रस्तावित 0.4% के शुल्क को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं। उनका तर्क है कि अगर वे इस अतिरिक्त खर्च को ग्राहकों पर नहीं डाल पाए, तो उनके नेट प्रॉफिट में बड़ी गिरावट तय है। त्योहारी सीजन के दौरान, जब मार्केटिंग खर्च चरम पर होता है, तब यह बोझ और भी भारी महसूस होता है।

ब्रोकर्स की क्या है मांग?

स्टॉक मार्केट की दुनिया का समीकरण थोड़ा अलग है। Angel One, Zerodha और Groww जैसे दिग्गज ब्रोकर्स ने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है। ब्रोकर्स का मानना है कि कैपिटल मार्केट में ट्रांजैक्शन की वैल्यू रिटेल शॉपिंग के मुकाबले काफी ज्यादा होती है, इसलिए परसेंटेज के हिसाब से शुल्क लगाना निवेशकों के लिए बहुत महंगा पड़ सकता है।

इंडस्ट्री ने इसके समाधान के लिए ₹2 से ₹5 के बीच का एक कैप लगाने का सुझाव दिया है। साथ ही, ब्रोकर्स यह भी चाहते हैं कि MDR-फ्री ट्रांजैक्शन की मौजूदा लिमिट ₹2,000 से बढ़ाकर ₹20,000 की जाए।

निवेशकों के लिए संकेत

अब निवेशकों को इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रखनी होगी। अगर सरकार शुल्क का ऐसा ढांचा तय करती है जिसे कंपनियां आसानी से ग्राहकों पर नहीं डाल सकतीं, तो यह सीधे तौर पर उनकी 'बॉटम लाइन' को प्रभावित करेगा। आने वाले दिनों में रेगुलेटरी कमेंट्री और संभावित पायलट प्रोग्राम्स से यह साफ होगा कि क्या इंडस्ट्री को प्रस्तावित छूट मिल पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.