क्रिप्टो का दम! पारंपरिक फाइनेंस को बदलने पर मजबूर, 24x7 ट्रेडिंग और कैपिटल एफिशिएंसी की ओर कदम

BANKINGFINANCE
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AuthorAditya Rao|Published at:
क्रिप्टो का दम! पारंपरिक फाइनेंस को बदलने पर मजबूर, 24x7 ट्रेडिंग और कैपिटल एफिशिएंसी की ओर कदम
Overview

क्रिप्टो की दुनिया से आ रहे ज़बरदस्त बदलाव! खास तौर पर डेरिवेटिव्स और टोकनाइज्ड एसेट्स के क्षेत्र में हो रहे इनोवेशन, अब पारंपरिक फाइनेंस (TradFi) को **24x7 ट्रेडिंग** और ज़्यादा **कैपिटल एफिशिएंसी** अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं।

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क्रिप्टो की लीड से पारंपरिक फाइनेंस में इनोवेशन

क्रिप्टो की दुनिया में हो रहे इनोवेशन अब सीधे तौर पर पारंपरिक फाइनेंस (TradFi) के तौर-तरीकों को बदल रहे हैं। पहले जहां लग रहा था कि TradFi, क्रिप्टो को अपनाएगा, अब सीन पलट गया है। खासकर डेरिवेटिव्स (Derivatives) और 24/7 ट्रेडिंग के मामले में क्रिप्टो इंफ्रास्ट्रक्चर ने ऐसी छाप छोड़ी है कि बड़ी-बड़ी वित्तीय संस्थाएं भी अब खुद को बदलने पर मजबूर हो गई हैं।

डेरिवेटिव्स और टोकनाइजेशन में ज़बरदस्त उछाल

आजकल 'पर्पेचुअल फ्यूचर्स' (Perpetual Futures), जो कभी क्रिप्टो की खास चीज थी, डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में सबसे आगे निकल गई है। साल 2025 में सेंट्रलाइज्ड क्रिप्टो एक्सचेंजों (CEXs) ने $86.2 ट्रिलियन के पर्पेचुअल फ्यूचर्स का वॉल्यूम संभाला, जो पिछले साल के मुकाबले 47.4% ज़्यादा है। वहीं, डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंजों (DEXs) पर यह 346% बढ़कर $6.7 ट्रिलियन तक पहुंच गया। इससे साफ है कि डिजिटल एसेट मार्केट में कीमतों का पता लगाने और रिस्क संभालने के लिए डेरिवेटिव्स बहुत अहम हो गए हैं। कुल क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 79% इन्हीं से आता है। इसी के साथ, टोकनाइज्ड इक्विटी (Tokenized Equities) मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है। साल 2026 की शुरुआत तक यह $963 मिलियन से ज़्यादा तक पहुंच गया, जो पिछले साल से करीब 2,878% की भारी बढ़ोतरी है। इस विस्तार का अनुमान 2030 तक $4-5 ट्रिलियन तक पहुंचने का है, जिसमें रेगुलेशन का स्पष्ट होना और बड़े संस्थानों के पायलट प्रोजेक्ट्स का बड़ा हाथ है।

बड़े फाइनेंस प्लेयर्स ने अपनाई क्रिप्टो की टेक्नोलॉजी

बड़े-बड़े वित्तीय खिलाड़ी इस बदलते बाज़ार में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। $12.5 ट्रिलियन एसेट्स को मैनेज करने वाली BlackRock और अपने क्रिप्टो डेरिवेटिव्स में ग्रोथ दिखा रही CME Group जैसी संस्थाएं इस बात का सबूत हैं कि इंस्टिट्यूशंस कितने बड़े पैमाने पर शामिल हो रही हैं। अकेले CME Group का क्रिप्टो डेरिवेटिव्स वॉल्यूम अप्रैल 2025 में 129% बढ़कर $8.9 बिलियन हो गया। BlackRock का iShares Bitcoin ETF (IBIT) जैसे प्रोडक्ट्स शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। अप्रैल 2026 तक इसके ऑप्शंस मार्केट का ओपन इंटरेस्ट $27.61 बिलियन तक पहुंच गया, जिसने Deribit जैसे क्रिप्टो-नेटिव प्लेटफॉर्म्स को भी पीछे छोड़ दिया। यह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को रणनीतिक रूप से अपनाने का संकेत देता है, जो पारंपरिक एक्सचेंजों को 24/7 सेटलमेंट और कैपिटल एफिशिएंसी जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन के लिए प्रेरित कर रहा है।

जोखिम बरकरार: रेगुलेशन और एडॉप्शन की चुनौतियां

हालांकि, इन सब तेज़ बदलावों और इंटीग्रेशन के बावजूद, बड़े रिस्क अभी भी बने हुए हैं। क्रिप्टो डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम का 97% से ज़्यादा अभी भी अनरेगुलेटेड एक्सचेंजों पर होता है, जिससे पारदर्शिता और काउंटरपार्टी रिस्क (Counterparty Risks) बढ़ते हैं। रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बदल रहे हैं, लेकिन अभी भी बिखरे हुए हैं। अप्रैल 2026 में SEC का एक प्रस्ताव, जो क्रिप्टो ETF के लिए 85% एसेट एलिजिबिलिटी थ्रेशोल्ड तय करने की बात करता है, कंप्लायंस की दिक्कतें पैदा कर सकता है और रिटेल इन्वेस्टर्स की पहुंच को सीमित कर सकता है। इसके अलावा, टोकनाइजेशन से लिक्विडिटी (Liquidity) मिलने की उम्मीद है, लेकिन टोकनाइज्ड इक्विटी मार्केट, अपनी ग्रोथ के बावजूद, ग्लोबल इक्विटी कैपिटलाइज़ेशन की तुलना में अभी भी छोटा है। इससे यह पता चलता है कि व्यापक रूप से अपनाए जाने में अभी काफी चुनौतियाँ हैं। कुछ टोकनाइज्ड एसेट्स के लिए सिंथेटिक एक्सपोजर (Synthetic Exposure) का उपयोग मालिकाना हक और रेगुलेटरी सुरक्षा को लेकर जटिलताएं बढ़ाता है।

भविष्य: और इंटीग्रेशन और नए मॉडल

एनालिस्ट्स (Analysts) का अनुमान है कि डेरिवेटिव्स और टोकनाइज्ड रियल-वर्ल्ड एसेट्स (RWAs) दोनों में ग्रोथ जारी रहेगी। McKinsey के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक टोकनाइज्ड RWAs $2 ट्रिलियन तक पहुंच सकते हैं। यह मार्केट उन प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ रहा है जो क्रिप्टो और पारंपरिक एसेट्स दोनों ऑफर करते हैं, क्योंकि कैपिटल एफिशिएंसी और प्रोग्रामेबल पेमेंट्स (Programmable Payments) की मांग बढ़ रही है। क्रिप्टो के मार्केट स्ट्रक्चर से आ रहे इनोवेशन से फाइनेंशियल सर्विसेज के तौर-तरीके बदलते रहेंगे, और पारंपरिक प्लेयर्स को लगातार, ग्लोबलाइज्ड फाइनेंस के एक नए युग के लिए खुद को तैयार करना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.