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CRISIL की चेतावनी: भारतीय बैंकों के लिए खतरे की घंटी! धीमी होगी ग्रोथ, बढ़ेंगे एनपीए

BANKINGFINANCE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
CRISIL की चेतावनी: भारतीय बैंकों के लिए खतरे की घंटी! धीमी होगी ग्रोथ, बढ़ेंगे एनपीए
Overview

रेटिंग एजेंसी Crisil ने भारतीय बैंकों के लिए चेतावनी जारी की है। एजेंसी का अनुमान है कि अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) में बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ थोड़ी धीमी होकर **13%** रह सकती है, जबकि FY26 में यह **14%** रहने का अनुमान है। साथ ही, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) में **0.20%** की बढ़ोतरी होकर **2.5%** तक पहुंच सकते हैं।

बैंक लोन की ग्रोथ पर CRISIL का अनुमान ठंडा

रेटिंग एजेंसी Crisil Ratings की मानें तो अगले फाइनेंशियल ईयर में भारतीय बैंकों की लोन देने की रफ़्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में क्रेडिट ग्रोथ घटकर 13% रह जाएगी, जो कि FY26 के अनुमानित 14% से कुछ कम है। यह बदलाव देश की बदलती आर्थिक परिस्थितियों का संकेत दे रहा है।

एनपीए (NPA) में इजाफे का अंदेशा

वहीं, डूबे हुए कर्ज़ (Bad Loans) के मोर्चे पर अच्छी खबर की उम्मीद कम है। Crisil का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं और मार्च 2027 तक इनमें लगभग 0.20% की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कुल एनपीए 2.5% तक पहुंच सकते हैं। यह बताता है कि बैंकों को अब अपनी एसेट क्वालिटी पर और भी पैनी नज़र रखनी होगी।

भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू मुद्दे बने सिरदर्द

इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें हैं। वेस्ट एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों (MSMEs) के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है। इन कारोबारों के लिए यह क्षेत्र सप्लाई चेन और बाज़ार दोनों के लिहाज से अहम है। सेरेमिक्स और डायमंड पॉलिशिंग जैसे उद्योग पहले से ही इस तनाव का असर झेल रहे हैं।

इसके अलावा, देश के अंदरूनी कुछ नियामक मुद्दे भी चिंता बढ़ा रहे हैं। बिहार के माइक्रोफाइनेंस बिल और महाराष्ट्र की लोन माफी की योजनाओं जैसे कदम, सीधे तौर पर ग्राहकों की लोन चुकाने की क्षमता और बैंकों की एसेट क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।

Crisil के अधिकारियों ने बताया कि ऐसे किसी भी बड़े झटके की स्थिति में सरकार और सेंट्रल बैंक (RBI) हस्तक्षेप कर सकते हैं, लेकिन उनकी वर्तमान गणना में ऐसे किसी समर्थन का कोई ज़िक्र नहीं है।

लोन ग्रोथ के लिए डिपॉजिट का महत्व

लोन की क्वालिटी पर पड़ने वाले संभावित असर के अलावा, बैंकों के लिए अपनी लोन देने की क्षमता को बनाए रखने के लिए ग्राहकों से पर्याप्त डिपॉजिट जुटाना भी एक बड़ी चुनौती होगी। Crisil का कहना है कि अगर लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (Loan-to-Deposit Ratio) लगातार ऊंचा बना रहता है, तो बैंकों को अपनी नकदी (Cash Flow) को संभालने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा लोन बेचकर (Securitization) अन्य निवेशकों को बेचने का सहारा लेना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक कितनी कुशलता से डिपॉजिट आकर्षित कर पाते हैं और अपनी वित्तीय सेहत को सुचारू रूप से बनाए रखते हैं।

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