CreditAccess Grameen ने फंड जुटाने के लिए एक सिंडिकेटेड सोशल लोन के जरिए **$175 मिलियन** का कर्ज लिया है। यह कंपनी की पिछले पांच सालों में पांचवीं अंतरराष्ट्रीय उधारी है, जो अब उसकी कुल लायबिलिटी का **24%** हिस्सा बन चुकी है।
विदेशी कर्ज का जाल और स्ट्रैटेजी
CreditAccess Grameen Limited ने अपनी फंड जुटाने की रणनीति के तहत $175 मिलियन का सिंडिकेटेड सोशल लोन हासिल किया है। इस सुविधा को Standard Chartered Bank और DBS Bank के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह द्वारा व्यवस्थित किया गया है। यह ट्रांजैक्शन Reserve Bank of India के ऑटोमैटिक रूट के तहत एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के रूप में स्ट्रक्चर किया गया है।
पिछले पांच वर्षों में यह कंपनी का पांचवां अंतरराष्ट्रीय कर्ज है, जिससे कंपनी द्वारा जुटाया गया कुल विदेशी कर्ज $640 मिलियन तक पहुंच गया है। इस नए कर्ज का टेन्योर 3.25 साल है और इसे Secured Overnight Financing Rate (SOFR) के ऊपर 215 बेसिस पॉइंट्स के प्रीमियम पर तय किया गया है।
फंड के स्रोत और फाइनेंशियल हेल्थ
कंपनी का मुख्य मकसद अपने फंड के स्रोतों में विविधता लाना है। इससे कंपनी अपने डेट मैच्योरिटी प्रोफाइल को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएगी। अगर हम हालिया फाइनेंशियल आंकड़ों पर नजर डालें, तो कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 19.5% की सालाना बढ़ोतरी के साथ ₹30,946 करोड़ पहुंच गया है। इसके अलावा, एसेट क्वालिटी की बात करें तो पोर्टफोलियो एट रिस्क (PAR 90+) का अनुपात 1.1% पर स्थिर बना हुआ है।
रिस्क और चुनौतियां
विदेशी कर्ज से पूंजी तो मिलती है, लेकिन साथ ही करेंसी फ्लक्चुएशन का रिस्क भी बना रहता है। विदेशी मुद्रा में कर्ज होने के कारण कंपनी को एक्सचेंज रेट के उतार-चढ़ाव को मैनेज करना पड़ता है, जिसके लिए हेजिंग (Hedging) का सहारा लिया जाता है। हालांकि, हेजिंग की लागत समय-समय पर कंपनी के कुल ब्याज खर्च (Cost of Borrowing) को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में रूरल इकोनॉमी का प्रदर्शन और बदलते रेगुलेटरी नॉर्म्स पर भी निवेशकों की नजरें बनी रहेंगी।
