भारत में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने का तरीका बदल रहा है। लोग अब कर्ज लेने के बजाय कार्ड को सिर्फ पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। 'रिवॉल्वर्स' (Revolvers) की संख्या **21%** से गिरकर **11%** रह गई है, जिससे HDFC Bank और SBI Cards जैसे बड़े लेंडर्स पर दबाव बढ़ रहा है।
बाजार में क्या बदल रहा है?
देश में क्रेडिट कार्ड से खर्च का आंकड़ा लगातार ₹2 लाख करोड़ के पार बना हुआ है, लेकिन अब ग्राहकों की आदतें बदल चुकी हैं। कार्ड होल्डर्स अब इसे क्रेडिट लेने के जरिये के बजाय ट्रांजेक्शन के लिए आसान टूल की तरह देख रहे हैं। इसका सीधा असर बैंकों की कमाई पर पड़ रहा है क्योंकि उनका सबसे बड़ा रेवेन्यू सोर्स, यानी 'ब्याज', अब कम हो गया है।
'रिवॉल्वर्स' की घटती संख्या से टेंशन
बैंकिंग भाषा में 'रिवॉल्वर' वह ग्राहक होता है जो अपना बिल पूरा नहीं भरता और ब्याज देता है। यह सेगमेंट बैंकों के लिए सबसे ज्यादा मुनाफे वाला होता है। लेकिन अब ये आंकड़े 21% से लुढ़क कर महज 11% पर आ गए हैं। इसका मतलब है कि बैंकों के पास ट्रांजेक्शन तो खूब हो रहे हैं, लेकिन ब्याज के रूप में आने वाली कमाई कम हो गई है।
कंपनियों पर असर
इसका असर नतीजों में भी दिख रहा है। SBI Cards का रिटेल स्पेंड जून तिमाही में 14% बढ़ा, लेकिन बावजूद इसके कंपनी की ब्याज से होने वाली इनकम 3% घटकर ₹2,421 करोड़ रह गई। वहीं, मार्केट लीडर HDFC Bank (जिसका मार्केट शेयर 22% है) के पोर्टफोलियो यील्ड पर भी दबाव दिख रहा है।
निवेशक क्या करें?
अब बैंक इस नुकसान की भरपाई के लिए ग्राहकों को EMI में कन्वर्जन के लिए जोर दे रहे हैं। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को बचाए रखना बैंकों के लिए बड़ी चुनौती है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे बिना पुराने 'रिवॉल्वर मॉडल' के मुनाफा कैसे मेंटेन रखते हैं।
