क्रेडिट कार्ड पर सिर्फ 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (Minimum Amount Due) भरने से आप **36% से 48%** तक के सालाना भारी ब्याज के जाल में फंस सकते हैं। यह आम आदत कर्ज का एक ऐसा चक्र बना सकती है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और आपकी ब्याज-मुक्त अवधि (Grace Period) भी खत्म हो जाती है।
भारत में क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (Minimum Amount Due) एक बड़ा फाइनेंशियल जाल बनता जा रहा है। बैंक स्टेटमेंट में कुल देय राशि के साथ एक छोटी 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' राशि भी लिखी होती है। इसे भरने से भले ही लेट पेमेंट फीस से बचा जा सके और अकाउंट एक्टिव रहे, लेकिन इसकी कीमत बहुत भारी चुकानी पड़ती है।
36% से 48% तक का ब्याज
ज्यादातर क्रेडिट कार्ड 36% से 48% तक का सालाना ब्याज वसूलते हैं। जब आप सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते हैं, तो बची हुई राशि पर खरीद की तारीख से ही यह भारी ब्याज लगना शुरू हो जाता है। इतनी ऊंची ब्याज दर के कारण, ब्याज बहुत तेजी से बढ़ता है और मूल राशि चुकाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यह सुविधा एक बड़े कर्ज के चक्र में बदल जाती है।
इंटरेस्ट-फ्री ग्रेस पीरियड का नुकसान
मिनिमम ड्यू भरने का एक और बड़ा नुकसान यह है कि इससे आपकी इंटरेस्ट-फ्री ग्रेस पीरियड (Interest-Free Grace Period) खत्म हो जाती है। आम तौर पर, अगर आप ड्यू डेट तक पूरा बिल भर देते हैं, तो आपको खरीद पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ता। लेकिन, मिनिमम ड्यू चुनने पर यह छूट खत्म हो जाती है। इसका मतलब है कि न सिर्फ बची हुई राशि पर, बल्कि कार्ड पर होने वाले सभी नए खर्चों पर भी ब्याज लगना शुरू हो जाता है, जब तक कि आप पूरा बिल क्लियर न कर दें।
RBI के नियमों और डिजिटल पेमेंट का कन्फ्यूजन
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, बैंकों को मिनिमम ड्यू भरने के नतीजों के बारे में बताना अनिवार्य है। लेकिन, यह जानकारी अक्सर लंबे-चौड़े PDF स्टेटमेंट के तकनीकी हिस्सों में छिपी होती है। आजकल लोग ज्यादातर मोबाइल बैंकिंग ऐप और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ 'मिनिमम ड्यू' का ऑप्शन जल्दी से पेनल्टी से बचने का तरीका लगता है। बिना कंपाउंड इंटरेस्ट (Compounded Interest) के भारीcosts की स्पष्ट जानकारी के, कई लोग इसे चुन लेते हैं और कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
क्रेडिट स्कोर पर भी असर
लगातार भारी बकाया राशि रखने से आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो (Credit Utilization Ratio) बढ़ जाता है, जिससे CIBIL स्कोर जैसे क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ता है। भविष्य में घर, कार या पर्सनल लोन लेना महंगा या मुश्किल हो सकता है। इसलिए, क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल यही है कि हमेशा ड्यू डेट से पहले पूरा स्टेटमेंट बैलेंस चुकाया जाए, ताकि इंटरेस्ट-फ्री विंडो बनी रहे और आप इस हाई-इंटरेस्ट वाले कर्ज के जाल से बच सकें।
