Top Indian Banks: कॉर्पोरेट लोन में बंपर उछाल, रिटेल क्रेडिट पीछे छूटा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Top Indian Banks: कॉर्पोरेट लोन में बंपर उछाल, रिटेल क्रेडिट पीछे छूटा

जून तिमाही में भारत के बड़े प्राइवेट बैंकों में कॉर्पोरेट लोन ग्रोथ **26%** रही, जो रिटेल लोन ग्रोथ से कहीं ज़्यादा है। बढ़ती सरकारी बॉन्ड यील्ड (Yield) के कारण डेट मार्केट से उधार लेना महंगा हो गया है, जिससे कंपनियां वर्किंग कैपिटल के लिए बैंक लोन की ओर रुख कर रही हैं।

बदले बैंकिंग के समीकरण: कॉर्पोरेट लोन में बड़ा उछाल!

जून तिमाही के दौरान भारतीय प्राइवेट बैंकों के लिए एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कॉर्पोरेट लोन ग्रोथ में औसतन 26% का ज़बरदस्त उछाल आया है। यह रिटेल लोन सेगमेंट में आई महज़ 10% की मामूली बढ़ोतरी से काफी अलग है। यह ट्रेंड दिखाता है कि कंपनियां अपने ऑपरेशंस और विस्तार के लिए एक बार फिर पारंपरिक बैंक लोन की ओर मुड़ रही हैं।

बॉन्ड यील्ड का बढ़ता बोझ

इस बदलाव के पीछे का सबसे बड़ा कारण डेट मार्केट में उधार लेने की लागत का बढ़ना है। 10-साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड, जो कॉर्पोरेट बॉन्ड की प्राइसिंग के लिए बेंचमार्क का काम करती है, तिमाही के दौरान 7.13% के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। पिछले साल की इसी तिमाही के 6.30% और पिछली तिमाही के 6.68% के मुकाबले यह एक बड़ी बढ़ोतरी है। जब कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी करना महंगा हो गया, तो कंपनियों ने बैंक लोन लेना ज़्यादा पसंद किया। उदाहरण के लिए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक साल की MCLR (Marginal Cost of Funds based Lending Rate) फिलहाल 8.70% है, जो बैंकों के लिए एक महत्वपूर्ण दर है।

बैंकों में ग्रोथ का अलग-अलग नज़ारा

बड़े प्राइवेट बैंकों के अलग-अलग नतीजों से यह ट्रेंड और भी साफ होता है। HDFC बैंक के कॉर्पोरेट बुक में 18.6% की ग्रोथ देखी गई, जबकि उसके रिटेल लोन सेगमेंट में 7.2% की बढ़ोतरी हुई। Axis बैंक ने और भी आक्रामक रुख दिखाया, कॉर्पोरेट एडवांसेज में 38% का उछाल आया, जबकि रिटेल लोन में सिर्फ 8% की ग्रोथ दर्ज की गई। इसी तरह, Yes बैंक ने 41% की कॉर्पोरेट एडवांसेज ग्रोथ बताई, वहीं रिटेल लोन 7% ही बढ़े। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनियां अपना कर्ज़ चुकाने के लिए किस तरह बैंकों की तरफ देख रही हैं।

किन सेक्टर्स में ज़्यादा मांग?

कॉर्पोरेट उधार में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हो रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर, कमर्शियल रियल एस्टेट और मेटल जैसे सेक्टर फंड की लगातार मांग कर रहे हैं। ICICI बैंक जैसे संस्थानों के अधिकारियों ने बताया है कि इक्विटी मार्केट में नरमी और बॉन्ड मार्केट में बढ़ती लागत के कारण, बैंकों द्वारा प्रदान किया गया वर्किंग कैपिटल लिक्विडिटी का पसंदीदा स्रोत बन गया है। इसके अलावा, कंपनियां अपनी कैपिटल स्पेंडिंग योजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं, जिससे प्रोजेक्ट फाइनेंस और टर्म लोन में भी तेज़ी देखी जा रही है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ अपनी रफ्तार बनाए रख पाती है या नहीं, और साथ ही बैंकों की एसेट क्वालिटी पर इसका क्या असर पड़ता है। जैसे-जैसे बैंक कॉर्पोरेट लोन पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, मुनाफे को बनाए रखना और इंफ्रास्ट्रक्चर व रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स में डिफ़ॉल्ट के जोखिम को मैनेज करना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य की तिमाही रिपोर्टों पर नज़र रखनी होगी कि क्या यह ट्रेंड जारी रहता है या बॉन्ड मार्केट यील्ड स्थिर होती है, जिससे उधार लेने का व्यवहार वापस डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर शिफ्ट हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.