अस्पताल के बिल में इंश्योरेंस कंपनी द्वारा की गई अनुचित कटौती से परेशान हैं? 2024 के नए IRDAI मास्टर सर्कुलर के तहत अब आप गलत डिडक्शन को चुनौती दे सकते हैं और अपना पैसा वापस पा सकते हैं।
IRDAI के 2024 के मास्टर सर्कुलर ने पॉलिसीधारकों को एक मजबूत हथियार दिया है। अब इंश्योरेंस कंपनियां मनमाने तरीके से क्लेम में कटौती नहीं कर सकतीं। नए नियमों के अनुसार, कंपनियों को क्लेम रिजेक्ट या कम करने की हर वजह का स्पष्ट और विस्तृत विवरण देना अनिवार्य है।
अनुपातिक कटौती (Proportionate Deductions) पर रोक
अक्सर अस्पताल के रूम रेंट की सीमा पार होने पर कंपनियां इलाज के अन्य खर्चों पर भी आनुपातिक कटौती (Proportionate Deduction) लगा देती हैं। लेकिन, नए नियमों के मुताबिक, फार्मेसी, सर्जिकल इंप्लांट्स, डायग्नोस्टिक टेस्ट और ICU जैसे खर्चों पर यह कटौती नहीं की जा सकती। यदि आपकी कंपनी ने इन मदों में कटौती की है, तो आप तुरंत आपत्ति जताकर री-कैलकुलेशन की मांग कर सकते हैं।
क्लेम विवाद सुलझाने का तरीका
- दस्तावेज जुटाएं: अस्पताल डिस्चार्ज के समय कंपनी से फाइनल अप्रूवल लेटर की कॉपी जरूर लें। यह अपील के लिए सबसे जरूरी सबूत है।
- कंपनी में शिकायत: यदि कटौती पॉलिसी शर्तों के खिलाफ है, तो सीधे इंश्योरेंस कंपनी में लिखित शिकायत दर्ज करें। कंपनियों को 14 दिनों के भीतर इसका जवाब देना अनिवार्य है।
- Bima Bharosa पोर्टल: यदि कंपनी आपकी बात नहीं सुनती, तो IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल पर सीधे शिकायत करें।
- Insurance Ombudsman: यदि यहाँ भी समाधान न मिले, तो आप Insurance Ombudsman का दरवाजा खटखटा सकते हैं, जहाँ बिना किसी कानूनी खर्च के आप अपनी बात रख सकते हैं।
अगली बार रिन्यूअल के समय ऐसी पॉलिसी चुनें जो 'कंज्यूमेबल्स' (Consumables) के लिए कवर देती हो, ताकि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान जेब से खर्च का रिस्क कम हो सके।
