कोझिकोड की कंज्यूमर कमीशन ने Union Bank of India के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाया है। बैंक को एक ऐसे ATM ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहक को ₹10,000 वापस करने और ₹5,000 का हर्जाना देने का आदेश दिया गया है, जिसमें पैसे तो खाते से कट गए लेकिन निकले नहीं। यह मामला RBI के दिशानिर्देशों के तहत ग्राहक सेवा में बैंक की बड़ी चूक को उजागर करता है।
आखिर क्या हुआ था?
कोझिकोड की डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने Union Bank of India को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक को ₹10,000 की राशि रिफंड करे और साथ ही ₹5,000 का हर्जाना भी दे। यह मामला एक ऐसे ATM ट्रांजैक्शन से जुड़ा है, जिसमें ग्राहक के खाते से पैसे तो कट गए, लेकिन ATM से कैश नहीं निकला।
कमीशन ने पाया कि बैंक यह साबित नहीं कर सका कि ट्रांजैक्शन सफल था। बैंक ने इलेक्ट्रॉनिक जर्नल (EJ) लॉग्स का सहारा लिया, लेकिन ग्राहक को कैश मिलने का कोई पुख्ता सबूत, जैसे कि CCTV फुटेज, पेश नहीं कर सका। कमीशन ने इसे सेवा में कमी माना और जोर दिया कि ग्राहकों की शिकायतों को सुलझाने के लिए बैंकों को पुख्ता सबूत पेश करने होंगे।
RBI के नियमों का उल्लंघन?
यह फैसला डिजिटल और ATM ट्रांजैक्शन को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त दिशानिर्देशों के पालन के महत्व पर जोर देता है। मौजूदा नियमों के तहत, बैंकों को ऐसे फेल हुए ATM ट्रांजैक्शन को T+5 वर्किंग डेज के अंदर ठीक करना होता है। अगर बैंक समय सीमा का पालन नहीं कर पाता या आंतरिक रिकॉर्ड से विवाद को सुलझा नहीं पाता, तो उसे अक्सर कंज्यूमर कोर्ट में जवाबदेही झेलनी पड़ती है।
निवेशकों के लिए, ऐसी घटनाएं बैंकिंग संस्थानों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम की जानकारी देती हैं। हालांकि एक छोटे से जुर्माने का असर बड़े सरकारी बैंक पर मामूली होता है, लेकिन ग्राहकों के विवादों को संभालने की क्षमता ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा है। खराब ग्रीवेंस हैंडलिंग से मुकदमेबाजी का खर्च बढ़ सकता है, कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है और नियामकों की नजर में टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनल कंट्रोल्स को लेकर सख्ती बढ़ सकती है।
ग्राहक सेवा पर नजर
जैसे-जैसे सरकारी बैंक अपने डिजिटल नेटवर्क और ATM का विस्तार कर रहे हैं, ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में, विश्वसनीय ट्रैकिंग और एविडेंस-रिट्रीवल सिस्टम का होना बेहद जरूरी है। निवेशक अक्सर बैंक की हाई सर्विस स्टैंडर्ड्स और प्रभावी डिस्प्यूट रेजोल्यूशन मैकेनिज्म को बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखते हैं, क्योंकि ये ग्राहक के विश्वास और लंबे समय तक टिके रहने में योगदान करते हैं। बैंक के अगले कदम में कमीशन के आदेश का पालन करना और विवाद समाधान के लिए अपनी इंटरनल एविडेंस-कीपिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा करना शामिल होगा।
