भारत के कमर्शियल सेक्टर के लिए फंड का प्रवाह अप्रैल से जुलाई **2026** के बीच उछलकर **₹10.65 लाख करोड़** पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। हालांकि यह लेंडिंग में तेजी को दर्शाता है, लेकिन क्रेडिट और डिपॉजिट के बीच बढ़ता अंतर बैंकों के मुनाफे पर दबाव डाल सकता है।
भारतीय कंपनियों और आम लोगों की ओर से कर्ज लेने की रफ्तार में जबरदस्त इजाफा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान कमर्शियल सेक्टर को कुल ₹10.65 लाख करोड़ की फंडिंग मिली, जो साल 2025 की इसी अवधि के ₹4.48 लाख करोड़ के मुकाबले काफी अधिक है।
कर्ज की बढ़ती मांग
इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह 'नॉन-फूड बैंक क्रेडिट' है। बैंकों ने बिजनेस, हाउसिंग और पर्सनल जरूरतों के लिए जबरदस्त कर्ज बांटा है। इस सेगमेंट में अकेले ₹6.69 लाख करोड़ का योगदान रहा, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ ₹0.73 लाख करोड़ था। जुलाई 2026 के अंत तक कुल आउटस्टैंडिंग क्रेडिट ₹323.14 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जिसमें सालाना आधार पर 17.4% की ग्रोथ देखी गई है।
विदेशी फंडिंग और चुनौतियां
भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी पैसा जुटा रही हैं, जहां विदेशी फंडिंग ₹1.39 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.08 लाख करोड़ हो गई है। हालांकि, यह चमकती हुई तस्वीर बैंकों के लिए एक बड़ी चुनौती भी लेकर आई है। बैंकों के पास कर्ज की मांग तो बहुत है, लेकिन उस अनुपात में डिपॉजिट (जमा) नहीं आ रहे हैं।
अगर यह गैप बना रहा, तो बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर बुरा असर पड़ सकता है। इसे बैलेंस करने के लिए बैंकों को डिपॉजिट रेट्स बढ़ाने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर उनकी प्रॉफिटेबिलिटी पर होगा।
मैक्रो रिस्क और MSME
वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और महंगाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऑयल की कीमतों में कोई भी अचानक उछाल देश के करेंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, MSME सेक्टर अभी भी सप्लाई चेन की दिक्कतों से जूझ रहा है, जिससे लेंडर्स छोटे बिजनेस को कर्ज देने में काफी सावधानी बरत रहे हैं।
निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि बैंक इस लोन डिमांड और डिपॉजिट के बीच कैसा संतुलन बनाते हैं। आने वाली तिमाहियों में बैंक मैनेजमेंट की कमेंट्री यह तय करेगी कि क्या वे अपने मार्जिन को बचाते हुए इस ग्रोथ को बरकरार रख पाएंगे।
