OCC ने दी हरी झंडी, लेकिन शर्तें लागू
यह अप्रूवल फाइनल नहीं है, बल्कि Coinbase को कुछ खास शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें मजबूत कंप्लायंस सिस्टम (Compliance System) बनाना, अहम स्टाफ की नियुक्ति और गहन रेगुलेटरी जांच पास करना शामिल है। इससे यह साबित होगा कि कंपनी ग्राहकों की संपत्ति को सुरक्षित रख सकती है और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) नियमों का सख्ती से पालन कर सकती है।
रेवेन्यू के लिए बड़ा दांव: कस्टडी सर्विसेज पर फोकस
यह कदम Coinbase की अस्थिर ट्रेडिंग फीस (Trading Fees) पर निर्भरता कम करने की स्ट्रैटेजी (Strategy) को सपोर्ट करता है। कस्टडी सर्विसेज से कंपनी को एक ज्यादा प्रेडिक्टेबल रेवेन्यू स्ट्रीम (Revenue Stream) मिलने की उम्मीद है, जो लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) के लिए जरूरी है। कंपनी पहले से ही कई US स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) के लिए कस्टोडियन के तौर पर काम कर रही है, यानी फंड मैनेजर्स के लिए एसेट्स (Assets) को सुरक्षित रख रही है।
इंस्टीट्यूशन्स की बढ़ती मांग और रेगुलेटेड कस्टडी का महत्व
यह मंजूरी तब आई है जब बड़े निवेशक क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में कदम रख रहे हैं और उन्हें रेगुलेटेड कस्टडी सॉल्यूशंस (Custody Solutions) की मांग बढ़ रही है। इंस्टीट्यूशन्स के लिए, सुरक्षित और भरोसेमंद कस्टडी सबसे अहम होती है, जो ट्रेडिंग से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। OCC से मिला फेडरल चार्टर एक ऐसा भरोसा देता है जो स्टेट लाइसेंस (State License) से शायद न मिले, जिससे Coinbase जैसी रेगुलेटेड फर्म्स पेंशन फंड्स जैसी संस्थाओं के लिए पसंदीदा विकल्प बन जाती हैं।
इंडस्ट्री में बढ़ता ट्रेंड
Coinbase ने अक्टूबर में इस चार्टर के लिए अप्लाई किया था। Ripple जैसी अन्य कंपनियां भी ऐसी ही रेगुलेटेड स्ट्रक्चर के लिए फाइल कर चुकी हैं। Citadel जैसी कंपनियों द्वारा समर्थित EDX Markets ने भी हाल ही में एक ऐसी ही रेगुलेटेड स्ट्रक्चर के लिए अप्लाई किया है। यह दिखाता है कि इंडस्ट्री में डिजिटल एसेट कस्टडी को फॉर्मलाइज करने और रेगुलेट करने का एक बड़ा ट्रेंड चल रहा है।