Cochin Shipyard के ऑफर फॉर सेल (OFS) को पहले ही दिन संस्थागत निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। पहले दिन ही इस इश्यू में 3.52 गुना ज्यादा बोलियां आईं। सरकार अपनी 5.04% हिस्सेदारी बेचकर लगभग ₹1,800 करोड़ जुटाएगी।
सरकारी हिस्सेदारी बिक्री में निवेशकों का भरोसा
Cochin Shipyard Limited के ऑफर फॉर सेल (OFS) में मंगलवार, 7 जुलाई को संस्थागत निवेशकों (institutional investors) ने जमकर पैसा लगाया। इश्यू पहले दिन ही 3.52 गुना सब्सक्राइब हो गया, जिसके चलते सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन (green shoe option) का पूरा इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इस कदम से सरकार को ₹1,800 करोड़ के करीब जुटाने में मदद मिलेगी, क्योंकि वह कंपनी में अपनी 5.04% हिस्सेदारी बेच रही है।
क्या है ग्रीन शू ऑप्शन?
ग्रीन शू ऑप्शन सरकार को अतिरिक्त शेयर बेचने की अनुमति देता है, जब किसी इश्यू में निवेशकों की मांग बहुत ज्यादा होती है। इस OFS में संस्थागत निवेशकों की भारी मांग को देखते हुए सरकार ने यह विकल्प चुना है। इश्यू का संस्थागत हिस्सा ₹1,401.85 प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ, जो कि तय फ्लोर प्राइस ₹1,400 से थोड़ा ऊपर है। अब, खुदरा निवेशकों (retail investors) और कर्मचारियों के लिए बोलियां बुधवार, 8 जुलाई को खुलेंगी। यह बिक्री सरकार की उन पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) में हिस्सेदारी कम करने की बड़ी योजना का हिस्सा है, ताकि सालाना विनिवेश (disinvestment) लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
हिस्सेदारी बिक्री का असर
निवेशकों के लिए, यह OFS कंपनी की इक्विटी संरचना (equity structure) में एक बड़ा बदलाव है। इस बिक्री से पहले, सरकार के पास शिपबिल्डिंग फर्म में 67.91% हिस्सेदारी थी। 5.04% हिस्सेदारी बेचने के बाद, सरकार का कुल स्वामित्व कम हो जाएगा, जिससे कंपनी का फ्री फ्लोट (free float) यानी सार्वजनिक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयरों की संख्या बढ़ जाएगी। ऐतिहासिक रूप से, सरकार अपनी संपत्ति बिक्री से ₹80,000 करोड़ का सालाना राजस्व लक्ष्य हासिल करने के लिए ऐसे शेयर बिक्री करती है।
शेयर बिक्री पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद, मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर Cochin Shipyard के शेयर की कीमत में गिरावट देखी गई। स्टॉक पिछले दिन के मुकाबले ₹56.45 या 3.75% गिरकर ₹1,448.30 पर बंद हुआ। निवेशक अक्सर OFS के दौरान शेयर के रिएक्शन पर नजर रखते हैं, क्योंकि फ्लोर प्राइस अल्पकालिक बाजार की धारणा (market sentiment) को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
आगे चलकर, बाजार प्रतिभागी 8 जुलाई को खुदरा और कर्मचारी बोली प्रक्रिया के पूरा होने पर नजर रखेंगे। OFS के तत्काल बाद, Cochin Shipyard का दीर्घकालिक प्रदर्शन (long-term performance) जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत सेवाओं (shipbuilding and ship repair services) के लिए उसके ऑर्डर बुक पर निर्भर करेगा। साथ ही, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (infrastructure projects) पर पूंजीगत व्यय (capital spending) के प्रबंधन की उसकी क्षमता भी अहम होगी। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि यह चालू फाइनेंशियल ईयर में सरकार की कई विनिवेश योजनाओं में से एक है, जिसके बाद Coal India और IRFC जैसी अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में भी ऐसी बिक्री हुई है। भविष्य में सरकारी विनिवेश की सफलता व्यापक बाजार की धारणा और प्रत्येक कंपनी की विशिष्ट विकास संभावनाओं पर निर्भर करेगी।
