City Union Bank (CUB) ने अगले 4 सालों के लिए **17.5%** की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से लोन बुक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। बैंक का इरादा इंडस्ट्री के औसत ग्रोथ रेट से **2-3%** ज्यादा तेजी से बढ़ने का है, जिसका मुख्य फोकस गोल्ड और MSME सेगमेंट पर रहेगा।
ग्रोथ का रोडमैप और पोर्टफोलियो पर फोकस
CUB ने फाइनेंशियल ईयर 2026 से 2028 के बीच अपनी लोन बुक को लगातार बढ़ाने की रणनीति बनाई है। इस अवधि में बैंक 17.5% की सालाना ग्रोथ हासिल करना चाहता है, जो कि बैंकिंग सेक्टर की औसत ग्रोथ से काफी ज्यादा है। बैंक अपने मुख्य क्षेत्रों, खासकर गोल्ड लोन और MSME (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज) सेगमेंट में अपनी पैठ मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
बैंक के हालिया नतीजों में, प्रोविजन्स और कंटिंजेंसी से पहले का कोर प्रॉफिट उम्मीद से करीब 11% बेहतर रहा। इसका मुख्य कारण नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में सुधार और ऑपरेटिंग खर्चों पर बेहतर नियंत्रण रहा।
पोर्टफोलियो का स्ट्रक्चर और मार्जिन आउटलुक
भविष्य के लिए बैंक ने अपने पोर्टफोलियो का स्ट्रक्चर भी साफ कर दिया है। गोल्ड लोन कुल एडवांसेज का 31-32% रहने की उम्मीद है, जबकि MSME सेगमेंट 55-60% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा हिस्सा होगा। वहीं, सिक्योर्ड रिटेल लोन पोर्टफोलियो का 10% हिस्सा बनाएंगे। इन अनुमानों के आधार पर, फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) के अनुमान को 5 बेसिस पॉइंट बढ़ाया गया है।
हालांकि, ऊंची इंटरेस्ट मार्जिन अच्छी खबर है, लेकिन निवेशकों को यह भी ध्यान देना होगा कि हालिया तिमाही में लोन की मांग में नरमी के कारण प्रोसेसिंग फीस से होने वाली फी इनकम उम्मीद से कम रही।
क्रेडिट कॉस्ट और आगे की राह
शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात क्रेडिट प्रोविजनिंग को लेकर बैंक का रुख है। एनालिस्ट्स ने एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) प्रोविजन्स से लगभग 60-65 बेसिस पॉइंट के एक बार के प्रभाव की आशंका जताई है। यह माना जा रहा है कि लंबे समय में क्रेडिट कॉस्ट पर इसका असर मामूली 4-5 बेसिस पॉइंट रहेगा। लेकिन, असली तस्वीर MSME और गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की एसेट क्वालिटी पर निर्भर करेगी। चूंकि MSME लेंडिंग इकोनॉमिक साइकल्स के प्रति संवेदनशील हो सकती है, इसलिए इस सेगमेंट में बैंक का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) को कम रखना उसकी वित्तीय सेहत का अहम पैमाना होगा।
आगे चलकर, निवेशकों को MSME सेक्टर में लोन ग्रोथ की निरंतरता, ECL प्रोविजन्स से क्रेडिट कॉस्ट का वास्तविक असर और लोन ग्रोथ के साथ फी इनकम में रिकवरी जैसे कारकों पर बारीकी से नजर रखनी होगी। बैंक का वैल्यूएशन फिलहाल उसके एवरेज बुक वैल्यू के मुकाबले आंका जा रहा है, जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या बैंक प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखते हुए अपनी लोन ग्रोथ का लक्ष्य हासिल कर पाता है।
