Citi India के मैनेजमेंट ने प्राइवेट कैपिटल स्पेंडिंग में तेजी के संकेत दिए हैं। रिन्यूएबल एनर्जी और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ने के साथ बैंक ने अपना एसेट बुक **₹1 लाख करोड़** के पार पहुंचा लिया है।
बदल रही है निवेश की तस्वीर
Citi India के CEO के बालासुब्रमण्यन के मुताबिक, देश में प्राइवेट सेक्टर का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) एक नए दौर में है। रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ट्रांसमिशन और डिफेंस जैसे सेक्टर्स में पैसा तेजी से लग रहा है। खास बात यह है कि डेटा सेंटर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्लोबल टेक कंपनियां और घरेलू दिग्गज कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं।
रिटेल से इंस्टिट्यूशनल की ओर बड़ा बदलाव
बैंक ने हाल के वर्षों में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। रिटेल बैंकिंग से पूरी तरह किनारा कर अब बैंक सिर्फ इंस्टिट्यूशनल क्लाइंट्स पर फोकस कर रहा है। यह बदलाव रंग ला रहा है, क्योंकि बैंक की इंस्टिट्यूशनल एसेट बुक अब ₹1 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी कॉम्प्लेक्स फाइनेंसिंग में अब Citi India मुख्य खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।
India-EU FTA से उम्मीदें
बैंक की नजरें अब जनवरी 2026 में संपन्न हुई बातचीत के बाद India-EU Free Trade Agreement के फाइनल होने पर टिकी हैं। इस ट्रेड डील के बाद इंजीनियरिंग, फार्मा और इंडस्ट्रियल सेक्टर में विदेशी निवेश का बड़ा प्रवाह आने की उम्मीद है। बैंक अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर बैंकिंग यूनिट को इसके लिए तैयार कर रहा है।
चुनौतियां और जोखिम
तेजी के बीच बैंक के सामने लिक्विडिटी और क्रेडिट रिस्क मैनेज करने की चुनौती बनी हुई है। साथ ही, ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और एनर्जी की कीमतों में बदलाव भी निवेश की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशक फिलहाल इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि India-EU ट्रेड पैक्ट कब तक औपचारिक रूप से साइन होता है और जमीनी स्तर पर प्रोजेक्ट्स का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
