Citigroup India: एशिया में डील बढ़ाने के लिए बड़ा दांव, Raj Rathi बने M&A हेड!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Citigroup India: एशिया में डील बढ़ाने के लिए बड़ा दांव, Raj Rathi बने M&A हेड!
Overview

Citigroup Inc. ने Raj Rathi को भारत में M&A (Mergers & Acquisitions) का नया हेड नियुक्त किया है। यह कदम एशिया में बैंक की इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (Investment Banking) क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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एशिया में Citigroup की बड़ी चाल

Citigroup एशिया में अपनी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (Investment Banking) गतिविधियों का तेजी से विस्तार कर रहा है। इस रणनीति के तहत, कंपनी ने Raj Rathi को भारत में M&A (Mergers & Acquisitions) का नेतृत्व संभालने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य भारत के मजबूत हो रहे डील मार्केट का फायदा उठाना और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) कॉमर्स जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में अवसरों को भुनाना है। बैंक को 2026 तक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में M&A डील, खासकर भारत से जुड़ी क्रॉस-बॉर्डर डील में लगातार ग्रोथ की उम्मीद है। Raj Rathi, जिनके पास JPMorgan Chase & Co. और Dream Sports जैसे बड़े नामों के साथ काम करने का अनुभव है, इस विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

भारत का M&A मार्केट कर रहा तरक्की

भारत का M&A मार्केट मजबूत बना हुआ है। 2025 में, डील का कुल मूल्य पिछले साल की तुलना में 18% बढ़कर $123.8 बिलियन हो गया, हालांकि सौदों की संख्या में थोड़ी कमी आई है। इससे पता चलता है कि अब बड़े और रणनीतिक सौदों को ज्यादा तरजीह दी जा रही है। नवंबर 2025 तक, भारत में लगभग $26 बिलियन के M&A सौदे हुए, जो कि एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। 2026 के लिए भी आउटलुक काफी सकारात्मक है, जिसमें विदेशी निवेश सुधारों और प्राइवेट इक्विटी (Private Equity) की निरंतर रुचि से डील एक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर, EMS और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख सेक्टर इस गतिविधि को आगे बढ़ा रहे हैं।

M&A डील्स में Citigroup आगे

Citigroup का यह विस्तार इसे अन्य ग्लोबल बैंकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा में डालता है जो भारत में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते हैं। 2025 में, Citigroup ने भारत की M&A एडवाइजरी लीग टेबल में टॉप स्थान हासिल किया, $25.9 बिलियन की डील्स में सलाह दी। यह 2024 के मुकाबले काफी बड़ी बढ़ोतरी थी। इस सफलता में Citigroup ने JPMorgan Chase & Co. को पीछे छोड़ा, जिसने $24.3 बिलियन के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। Morgan Stanley ने $18.2 बिलियन और Goldman Sachs Group ने $13.7 बिलियन की भारतीय M&A ट्रांजैक्शन्स में सलाह दी। यह कड़ी प्रतिस्पर्धा अनुभवी लीडरशिप के महत्व को दर्शाती है।

Citigroup के स्टॉक पर निवेशकों का भरोसा

Citigroup के स्टॉक ने पिछले 12 महीनों में करीब 104.9% का शानदार उछाल दिखाया है (अप्रैल 2026 तक)। यह निवेशकों के बैंक की टर्नअराउंड स्ट्रेटेजी पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। एनालिस्ट्स (Analysts) ज्यादातर इसे 'मॉडरेट बाय' (Moderate Buy) रेटिंग दे रहे हैं और कई 'बाय' (Buy) की सलाह दे रहे हैं। Piper Sandler और BofA जैसी फर्मों के प्राइस टारगेट (Price Target) $145 और $150 तक बढ़ाए गए हैं। हालांकि, बैंक का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो, जो अप्रैल/मई 2026 में 15.79 से 17.5 के आसपास था, उसके 10 साल के औसत 10.25 से काफी ऊपर है। कुछ विश्लेषण इसके फॉरवर्ड P/E रेशियो को पांच साल के औसत की तुलना में 'ओवरवैल्यूड' (Overvalued) भी बता रहे हैं।

विस्तार में जोखिम?

सकारात्मक आउटलुक और नई नियुक्तियों के बावजूद, Citigroup को अपने एशिया विस्तार में कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा एक बड़ा चैलेंज है। भारत का M&A मार्केट भले ही मजबूत हो, लेकिन लंबी अवधि की भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव डील की गति को धीमा कर सकते हैं। इसके अलावा, बैंक का P/E रेशियो, जो ऐतिहासिक औसत से ऊपर है, बताता है कि अगर ग्रोथ की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं या बाजार की स्थितियां खराब हुईं तो वैल्यूएशन पर दबाव आ सकता है। एशिया के विविध नियामक और आर्थिक माहौल में जटिल क्रॉस-बॉर्डर डील्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए Raj Rathi जैसे कुशल प्रतिभा, मजबूत जोखिम प्रबंधन और क्षेत्रीय बारीकियों को समझने की आवश्यकता होगी।

हाई-ग्रोथ सेक्टर्स पर फोकस

Raj Rathi की नियुक्ति सीधे तौर पर उन हाई-ग्रोथ सेक्टर्स के साथ जुड़ी है जहां M&A एक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है। भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और बढ़ते घरेलू वैल्यू एडिशन के समर्थन से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) में बड़ी वृद्धि देखी जा रही है। खास तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर, 2030 तक भारत में M&A का सबसे बड़ा सेगमेंट बनने की उम्मीद है। एक स्पेशलाइज्ड टीम बनाकर और गहरी बाजार समझ का उपयोग करके, Citigroup इन ट्रांसफॉर्मेटिव डील्स को सुविधाजनक बनाने में लीड करने का लक्ष्य रखता है, जो डायनामिक एशियाई वित्तीय परिदृश्य में महत्वपूर्ण बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

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