Citibank India के CEO K Balasubramanian का मानना है कि ग्लोबल निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि मार्केट का वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले अधिक आकर्षक स्तर पर आ गया है।
भारत को क्यों है AI पर फोकस की जरूरत?
दुनियाभर के निवेशक फिलहाल उन बाजारों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा है। Citibank India के CEO K Balasubramanian के अनुसार, भारत को ग्लोबल स्टेज पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए टेक्नोलॉजी-ड्रिवन ग्रोथ का नैरेटिव तैयार करना होगा। फिलहाल, निवेशक अमेरिका जैसे बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं, इसलिए भारत को अपनी इन्वेस्टमेंट वैल्यू को और अधिक ठोस साबित करना होगा।
Citibank India का शानदार प्रदर्शन
कंज्यूमर बैंकिंग से हटने के बाद, Citibank India का पूरा ध्यान अब इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स पर है। इसका नतीजा यह रहा है कि मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच बैंक के रेवेन्यू में 76% का भारी उछाल आया है। बैंक का नेट इनकम CAGR 16% रहा है और बैलेंस शीट का आकार बढ़कर ₹3.14 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
बाजार का हाल और IPO पाइपलाइन
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी का फॉरवर्ड अर्निंग मल्टीपल जो पहले 24-25 गुना हुआ करता था, अब घटकर 20-21 गुना के दायरे में आ गया है। यह करेक्शन नए पब्लिक इश्यूज के लिए एक हेल्दी माहौल तैयार कर रहा है। बैंक इस साल के अंत तक 1 बिलियन डॉलर से बड़े 3-4 बड़े ट्रांजेक्शन पूरा करने की तैयारी में है।
भविष्य की रणनीति
बैंक का पूरा ध्यान अब GIFT City पर है, जहां उनके एसेट्स 2.5 बिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गए हैं। इसके अलावा, साल 2027 में Axis Bank के साथ नॉन-कंपीट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद बैंक अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाएगा। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव और UK-EU के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स पर निवेशकों की पैनी नजर रहने वाली है, जो आगे चलकर विदेशी निवेश (FDI) के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
