Cholamandalam Investment and Finance Company ने पहली तिमाही में दमदार नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी का मुनाफा 46% बढ़कर ₹1,654 करोड़ हो गया, जिसका मुख्य कारण लोन ग्रोथ (Loan Growth) में आई तेज़ी है। कंपनी की AUM ₹2.5 ट्रिलियन के पार पहुंच गई है, वहीं ₹55,000 करोड़ जुटाने की योजना को भी मंजूरी मिल गई है। हालांकि, NPA में मामूली बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है।
Detailed Coverage
पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन
Cholamandalam Investment and Finance Company Ltd (CIFCL) ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दमदार शुरुआत की है। जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी ने ₹1,654 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 46% ज़्यादा है। इस शानदार प्रदर्शन का एक और मुख्य कारण कंपनी की नेट इनकम में हुई 28% की वृद्धि है, जो ₹4,930 करोड़ तक पहुँच गई।
एसेट्स में बढ़ोतरी और फंड जुटाने की योजना
कंपनी के लोन पोर्टफोलियो, जिसे Assets Under Management (AUM) से मापा जाता है, ने जून 2026 के अंत तक ₹2.5 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है, जो ₹2,54,392 करोड़ तक पहुँच गया है। यह पिछले साल की तुलना में 23% की वृद्धि दर्शाता है। इस लगातार बढ़ते बिजनेस विस्तार को सहारा देने के लिए, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (Non-Convertible Debentures) के ज़रिए ₹55,000 करोड़ तक की राशि जुटाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। यह फंड कई किश्तों में प्राइवेट प्लेसमेंट के ज़रिए जुटाया जाएगा।
लोन देने का प्रदर्शन और पोर्टफोलियो
तिमाही के दौरान लोन देने की गतिविधियों में तेज़ी देखी गई, जिसमें कुल दिए गए लोन 22% बढ़कर ₹29,612 करोड़ हो गए। व्हीकल फाइनेंस (Vehicle Finance) इस सेगमेंट में सबसे बड़ा योगदान दे रहा है, जो कुल लोन वितरण का 56% है। इस सेगमेंट में, हेवी कमर्शियल व्हीकल (Heavy Commercial Vehicle) और पैसेंजर व्हीकल (Passenger Vehicle) के लिए लोन वितरण 21% बढ़कर ₹16,503 करोड़ हो गया। कंपनी ने नए सेगमेंट में भी प्रगति दिखाई है, जिसमें MSME लोन तिमाही के लोन का 24% हिस्सा है। इसके अलावा, कंपनी के स्पेशलाइज्ड गोल्ड लोन (Gold Loan) बिजनेस ने 171 शाखाओं में ₹2,143 करोड़ की AUM दर्ज की है।
एसेट क्वालिटी और कैपिटल पोजीशन
जहां कंपनी ने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin) में 8.2% से 7.8% तक की वृद्धि दर्ज की है, वहीं निवेशकों की नज़र एसेट क्वालिटी पर बनी हुई है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross Non-Performing Assets), जो लोन की उस हिस्सेदारी को दर्शाते हैं जहां भुगतान में देरी हो रही है, जून 2026 में बढ़कर 4.50% हो गई, जो मार्च 2026 में 4.36% थी। इसी तरह, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Net Non-Performing Assets) भी पिछले तिमाही के 2.87% से बढ़कर 2.95% हो गई। इन सबके बावजूद, कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Capital Adequacy Ratio) 19.81% पर बना हुआ है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा आवश्यक 15% न्यूनतम सीमा से काफी ऊपर है, जिससे संभावित क्रेडिट जोखिमों से निपटने के लिए एक बफर मिलता है।
28 जुलाई 2026 को, कंपनी के शेयर BSE पर 1% की गिरावट के साथ ₹1,766.80 पर बंद हुए। आगे चलकर, निवेशकों के लिए मुख्य कारक यह होगा कि कंपनी अपनी एसेट क्वालिटी को कैसे मैनेज करती है, खासकर MSME और कंज्यूमर फाइनेंस (Consumer Finance) सेगमेंट में लोन बुक का विस्तार करते हुए। साथ ही, फंड जुटाने की योजनाओं का समय और लागत भी महत्वपूर्ण होगी।
