Cholamandalam Investment: ₹2,000 करोड़ के Perpetual Bond लाने की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Cholamandalam Investment: ₹2,000 करोड़ के Perpetual Bond लाने की तैयारी

Cholamandalam Investment and Finance, जो कि एक प्राइवेट लेंडर है, ₹2,000 करोड़ का Perpetual Bond इश्यू करने जा रही है। यह रकम कंपनी अपने एसेट्स (Assets) में **23%** की ग्रोथ के लिए इस्तेमाल करेगी। हालांकि, निवेशकों को Perpetual Bonds से जुड़े खास रिस्क के बारे में पता होना चाहिए, जिनकी कोई मैच्योरिटी डेट (Maturity Date) नहीं होती और ये सख्त रेगुलेटरी शर्तों के अधीन होते हैं।

Cholamandalam Investment and Finance Co. (CIFCL) ने ₹2,000 करोड़ तक जुटाने के लिए Perpetual Bonds जारी करने की योजना का ऐलान किया है। यह नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के लिए एक बड़ा कदम है, क्योंकि यह किसी भी प्राइवेट लेंडर द्वारा इस तरह का सबसे बड़ा डेट इश्यू (Debt Issue) होगा। कंपनी इस कैपिटल का इस्तेमाल अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने और क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए करेगी।

कंपनी की मजबूत ग्रोथ

Cholamandalam की क्रेडिट मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। 30 जून 2026 तक, कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 23% का ईयर-ऑन-ईयर (Year-on-Year) इजाफा हुआ है, जो ₹2,54,392 करोड़ तक पहुंच गया है। यह कंपनी की आक्रामक रणनीति को दिखाता है, जिसे मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का साथ मिला है। कंपनी ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में ₹1,656 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Consolidated Net Profit) दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 46% अधिक है।

Perpetual Bonds: क्या हैं और कैसे अलग?

Perpetual Bonds, स्टैंडर्ड बॉन्ड्स (Standard Bonds) से अलग होते हैं क्योंकि इनकी कोई फिक्स्ड मैच्योरिटी डेट (Fixed Maturity Date) नहीं होती। ये कंपनी के बुक्स (Books) में अनिश्चित काल तक बने रहते हैं, जब तक कंपनी कॉल ऑप्शन (Call Option) का इस्तेमाल करके इनका रीपेमेंट (Repayment) नहीं करती। उम्मीद है कि इस इश्यू में कंपनी एक कॉल ऑप्शन शामिल करेगी, जिससे वह एक दशक बाद बॉन्ड्स को रिडीम (Redeem) कर सके। ये इंस्ट्रूमेंट्स (Instruments) कंपनियों को इक्विटी (Equity) को डाइल्यूट (Dilute) किए बिना कैपिटल बेस बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन निवेशकों को इनके खास फीचर्स पर ध्यान देना चाहिए।

रेगुलेटरी नियम और रिस्क

भारत में रेगुलेटरी अथॉरिटीज (Regulatory Authorities) फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) सुनिश्चित करने के लिए Perpetual Debt को लेकर सख्त नियम रखती हैं। कंपनियों को स्पेसिफिक कैपिटलाइजेशन लेवल्स (Specific Capitalization Levels) को पूरा करना होता है और जरूरी अप्रूवल्स (Approvals) लेने होते हैं। खासकर, अगर कंपनी को लॉस (Loss) होता है, तो यह इंटरेस्ट (Interest) के रीपेमेंट को प्रभावित कर सकता है। चूंकि ये बॉन्ड्स सबऑर्डिनेटेड डेट (Subordinated Debt) माने जाते हैं, लिक्विडेशन (Liquidation) की स्थिति में इनका दर्जा अन्य डेट्स (Debts) से नीचे होता है। इसलिए, इन्हें स्टैंडर्ड सिक्योर बॉन्ड्स (Standard Secured Bonds) की तुलना में अधिक रिस्की (Risky) माना जाता है।

मार्केट का माहौल और कंपनी का शेयर

इस साल नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) द्वारा Perpetual Bonds का मार्केट थोड़ा धीमा रहा है, जो निवेशकों के बीच सतर्कता का संकेत देता है। Cholamandalam का इस स्पेस में बड़ा इश्यू लाने का फैसला, लेंडिंग ऑपरेशंस (Lending Operations) के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल (Long-term Capital) सुरक्षित करने की उनकी मंशा को दर्शाता है। कंपनी का स्टॉक, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹1.55 लाख करोड़ है, ₹1,838 के करीब ट्रेड कर रहा है। इन बॉन्ड्स का फाइनल इंटरेस्ट रेट (Coupon) बिडिंग प्रोसेस (Bidding Process) के दौरान मार्केट कंडीशंस (Market Conditions) के आधार पर तय होगा, जो जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। निवेशक फाइनल कूपन रेट (Coupon Rate) और इस लॉन्ग-टर्म कैपिटल से जुड़े इंटरेस्ट कॉस्ट (Interest Costs) को कैसे मैनेज करती है, इस पर नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.