IRDAI के नए नियमों ने Cholamandalam Investment and Finance Company की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इंश्योरेंस कमीशन पर कैप और अनिवार्य बंडलिंग पर रोक लगने से कंपनी की फीस इनकम पर असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए कंपनी अब हाई-यील्ड रिटेल लोन पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि **23%** का ग्रोथ टारगेट हासिल किया जा सके।
Cholamandalam Investment and Finance Company (CIFC) के सामने अब एक नई रेगुलेटरी चुनौती खड़ी हो गई है। IRDAI ने सिंगल-प्रीमियम क्रेडिट-लाइफ कमीशन को 2% तक सीमित करने और लोन के साथ इंश्योरेंस की अनिवार्य बंडलिंग पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। कंपनी के कुल एसेट्स में इंश्योरेंस-लिंक्ड फीस इनकम की हिस्सेदारी लगभग 48 बेसिस पॉइंट्स है, जिसके कारण यह बदलाव उनके लिए काफी मायने रखता है। बीते दो वर्षों में कंपनी की बांका (Banca) रेवेन्यू 68% की दर से बढ़ी है, जिससे अन्य NBFCs की तुलना में उन पर जोखिम ज्यादा है।
हाई-यील्ड रिटेल की ओर शिफ्ट
रेगुलेटरी बदलावों से मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए कंपनी अपने पोर्टफोलियो को बदल रही है। कंपनी का व्हीकल फाइनेंस बिजनेस अभी भी कुल एसेट्स में 50% की हिस्सेदारी रखता है, लेकिन अब कंपनी कंज्यूमर और स्मॉल एंटरप्राइज लोन पोर्टफोलियो पर फोकस बढ़ा रही है। छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों में विस्तार के जरिए कंपनी अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है ताकि मुख्य व्हीकल फाइनेंस बिजनेस के धीमे होने पर इसे एक सपोर्ट मिल सके।
एसेट क्वालिटी और परफॉरमेंस
रेगुलेटरी अनिश्चितता के बावजूद, कंपनी की एसेट क्वालिटी स्थिर है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में नेट क्रेडिट कॉस्ट घटकर 1.5% रह गई, जो पिछले साल इसी दौरान 1.8% थी। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के कारण कंपनी का रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) लगभग 3.7% के स्तर पर बना हुआ है।
वैल्यूएशन और मार्केट का नजरिया
रेगुलेटरी चिंताओं के कारण स्टॉक में हाल ही में 12% की गिरावट देखने को मिली है। वर्तमान में यह शेयर अपने अनुमानित फाइनेंशियल ईयर 2028 के बुक वैल्यू के 3.1 गुना पर ट्रेड कर रहा है। निवेशकों की नजर अब फाइनल रेगुलेटरी नोटिफिकेशन और कंपनी के आने वाले क्वार्टरली नतीजों पर है, जो यह तय करेंगे कि क्या कंपनी अपने ग्रोथ लक्ष्यों को बरकरार रख पाएगी।
