Cholamandalam Finance: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q4 में Profit **29.5%** उछला, AUM भी **21%** भागा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Cholamandalam Finance: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q4 में Profit **29.5%** उछला, AUM भी **21%** भागा
Overview

Cholamandalam Investment (CIFC) ने अपने Q4 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, और नतीजे दमदार रहे हैं! कंपनी का नेट प्रॉफिट **29.5%** बढ़कर **₹1,640.7 करोड़** पर पहुंच गया, जबकि नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में **26%** की बढ़ोतरी के साथ यह **₹3,855 करोड़** रही। इसके अलावा, कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) **21%** बढ़कर **₹2.43 लाख करोड़** हो गई।

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कंपनी के प्रदर्शन पर एक नज़र

Cholamandalam Investment के वित्तीय नतीजों ने शानदार ग्रोथ दिखाई है। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 29.5% बढ़कर ₹1,640.7 करोड़ रहा। यह उछाल नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 26% की जोरदार बढ़त के चलते संभव हुआ, जो ₹3,855 करोड़ पर रही। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 21% बढ़कर ₹2.43 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। कंपनी ने नए बिज़नेस सेगमेंट में भी अच्छी रफ्तार पकड़ी है; SME सेगमेंट की बुक 41% बढ़ी, जबकि सिक्योर्ड बिज़नेस और पर्सनल लोन 46% बढ़े। व्हीकल फाइनेंस AUM में 18%, प्रॉपर्टी पर लोन में 26%, और होम लोन में 23% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस तिमाही में कुल ₹32,913 करोड़ का डिस्बर्समेंट हुआ, और पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY) के लिए यह आंकड़ा ₹1.11 लाख करोड़ रहा।

शेयर में मामूली तेजी, NBFC सेक्टर पर दबाव

इन दमदार नतीजों के बावजूद, शेयर बाजार में स्टॉक को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। नतीजों के बाद शेयर ने ₹1,592.20 का ऊपरी स्तर छुआ, लेकिन NSE पर ₹1,559.60 के आसपास बंद हुआ। इसकी एक वजह NBFC सेक्टर पर मंडरा रहे दबाव हैं। NBFC सेक्टर, जो भारत के क्रेडिट ग्रोथ में अहम भूमिका निभाता है, आज बढ़ते दबावों का सामना कर रहा है। अनुमान है कि मार्च 2026 को समाप्त होने वाली तिमाही में एसेट ग्रोथ 15%-18% रहेगी, जिससे AUM लगभग ₹48-50 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। लेकिन, फंडिंग की लागत बढ़ रही है, जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव आ सकता है। ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बदलाव और महंगाई borrowers की चुकाने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जो अगले फाइनेंशियल ईयर में एसेट क्वालिटी को खतरे में डाल सकता है।

डायवर्सिफिकेशन रणनीति और वैल्यूएशन

CIFC की डायवर्सिफिकेशन (diversification) रणनीति, खास तौर पर SME और सिक्योर्ड बिज़नेस/पर्सनल लोन में, जहां जबरदस्त ग्रोथ दिख रही है, वहीं नए जोखिम भी पैदा कर रही है। ये सेगमेंट, विशेष रूप से SME लेंडिंग, आर्थिक मंदी और क्रेडिट चुनौतियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इन वेंचर्स में तेजी के लिए मजबूत रिस्क मैनेजमेंट की ज़रूरत है। कंपनी का मौजूदा ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ (TTM) प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 27.31 है। यह Muthoot Finance (P/E ~16.21) और Sundaram Finance (P/E ~26.75) जैसे पीयर्स की तुलना में ज्यादा है, लेकिन Bajaj Finance (P/E 29.8x-34.25x) और SBI Cards (P/E ~28.61x) जैसे डायवर्सिफाइड लेंडर्स के करीब है। निवेशक CIFC की ग्रोथ पोटेंशियल के लिए प्रीमियम देने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए लगातार मजबूत परफॉर्मेंस की ज़रूरत होगी। 31 मार्च 2026 तक, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 4.36% और नेट एनपीए 2.87% थे, जिसमें क्रमिक सुधार दिखा है, लेकिन आगे सावधानी बरतना ज़रूरी है।

एनालिस्ट की राय

विश्लेषकों (Analysts) की राय बंटी हुई है। कुछ 'Buy' रेटिंग के साथ ₹1,800 से ऊपर के टारगेट दे रहे हैं, तो वहीं Macquarie जैसी फर्म 'Sell' रेटिंग के साथ ₹1,330 का टारगेट दे रही हैं, जो वैल्यूएशन पर चिंता जता रहे हैं। Motilal Oswal ने 'Buy' रेटिंग और ₹2,000 का टारगेट दिया है, जो FY26 से FY28 तक AUM में 21% और PAT (Profit After Tax) में 26% की सालाना ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। बढ़ते खर्चों और डायवर्सिफिकेशन जोखिमों के बीच ग्रोथ बनाए रखना CIFC के लिए अहम होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.