लोन और डिपॉजिट में दमदार ग्रोथ
बैंक के नतीजों के मुताबिक, मार्च तिमाही में ग्रॉस एडवांसेज (Gross Advances) पिछले साल की तुलना में 18.9% बढ़कर ₹3.45 लाख करोड़ हो गए। वहीं, कुल डिपॉजिट (Total Deposits) भी 13.37% बढ़कर ₹4.68 लाख करोड़ पर पहुंच गए। इस ग्रोथ से बैंक के कुल बिजनेस में 15.65% की सालाना बढ़ोतरी हुई है, जो मजबूत क्रेडिट डिमांड और बढ़ते ग्राहक आधार को दर्शाता है।
बढ़ती लागतें दबा सकती हैं प्रॉफिट मार्जिन
लेकिन, चिंता का विषय फंडिग लागतों (Funding Costs) का बढ़ना है। बैंक का CASA (Current Account and Savings Account) रेश्यो पिछले साल के 49% से घटकर 47.31% पर आ गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब बैंक की कुल फंडिग में कम लागत वाली डिपॉजिट्स का हिस्सा कम हो गया है। यह समस्या पूरे बैंकिंग सेक्टर में देखी जा रही है, जहां लोन ग्रोथ डिपॉजिट ग्रोथ से आगे निकल रही है, जिससे बैंकों को सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) और मार्केट-लिंक्ड डिपॉजिट्स जैसे महंगे फंडिग स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। अनुमान है कि इससे इस तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins - NIMs) पर दबाव बढ़ेगा, जो लोन से होने वाली कमाई को कम कर सकता है।
एसेट क्वालिटी में हुआ सुधार
अच्छी खबर यह है कि Central Bank of India ने अपनी एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में भी सुधार दिखाया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPAs) घटकर 2.7% रह गए, जो पिछले तिमाही में 3.01% थे। वहीं, नेट एनपीए (Net NPAs) 0.45% पर स्थिर हैं। यह बैंकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
पीयर के मुकाबले प्रदर्शन और वैल्यूएशन
बावजूद इन मजबूत नंबरों के, Central Bank of India का प्रदर्शन सेक्टर के बाकी पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) जैसा नहीं रहा। जहां कई पीएसबी शेयरों ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में अच्छी तेजी दिखाई, वहीं CBI के शेयर में करीब 26% की गिरावट आई। निवेशकों की चिंताएं बढ़ती फंडिग लागतों और संभावित मार्जिन कंप्रेशन पर केंद्रित हैं, भले ही बैंक का P/E रेश्यो करीब 6.8x पर काफी कम हो।