नतीजों में दम, पर शेयर सस्तेvaluation पर क्यों?
Central Bank of India (CBI) के नतीजों पर नजर डालें तो बैंक ने इस तिमाही (Q3 FY26) में शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है। ग्रॉस एडवांसेस (Gross Advances) 19.57% बढ़कर ₹3.24 लाख करोड़ हो गए, जबकि डिपॉजिट्स 13.23% की दर से बढ़कर ₹3.62 लाख करोड़ हुए। कुल मिलाकर, बैंक का टोटल बिजनेस 15.8% बढ़कर ₹7.74 लाख करोड़ हो गया। इसके बावजूद, बैंक का शेयर अपने बुक वैल्यू (Book Value) के मुकाबले काफी सस्तेvaluation पर ट्रेड कर रहा है। इसका प्राइस-टू-बुक (P/B) Ratio सिर्फ 0.8x है, जो State Bank of India (SBI) के 1.8x और Nifty PSU Bank इंडेक्स के औसत 1.58x के मुकाबले काफी कम है। यह निवेशकों के लिए एक पहेली बनी हुई है कि क्यों मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर को यह डिस्काउंट मिल रहा है।
ग्रोथ की असली वजह: रूरल और SME पर फोकस
Central Bank of India की ग्रोथ का मुख्य कारण ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में उसका मजबूत नेटवर्क है। बैंक की 65% से ज्यादा शाखाएं इन्हीं इलाकों में हैं। बैंक रिटेल और स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) ग्राहकों पर फोकस कर रहा है, जो आमतौर पर हाई-यील्ड लोन (High-Yield Loan) प्रदान करते हैं। इसी रणनीति के चलते बैंक का क्रेडिट एक्सपेंशन (Credit Expansion) 11.61% ईयर-टू-डेट (YTD) रहा है, जो कैपिटल के कुशल उपयोग को दर्शाता है।
मार्जिन पर दबाव, पर एसेट क्वालिटी मजबूत
हालांकि, लोन ग्रोथ अच्छी होने के बावजूद, बैंक के Net Interest Margin (NIM) पर कुछ दबाव देखा गया है। यह पिछले साल के 3.45% से घटकर 2.96% पर आ गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बैंक के 60% से ज्यादा लोन रेपो-लिंक्ड (Repo-linked) हैं, जिससे इंटरेस्ट रेट में बदलाव का असर सीधे मुनाफे पर पड़ता है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि डिपॉजिट री-प्राइसिंग और हाई-यील्ड प्रोडक्ट्स में शिफ्ट होने से NIM 3% के आसपास बना रहेगा। Current Account Savings Account (CASA) रेश्यो भी घटकर 47.12% हो गया है। राहत की बात यह है कि बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) मजबूत बनी हुई है। Net Non-Performing Assets (NPAs) सुधरकर 0.45% हो गए हैं, और Provision Coverage Ratio (PCR) 96.7% पर है, जो अच्छी रिकवरी क्षमता को दर्शाता है।
जोखिम और चिंताएं
शेयर के सस्तेvaluation की कुछ वजहें चिंताजनक भी हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के कारण कच्चे तेल की कीमतें $90/barrel के पार जा चुकी हैं, जिससे भारत की इम्पोर्ट कॉस्ट, महंगाई और रुपए की स्थिरता पर खतरा बढ़ रहा है। इससे लोन पोर्टफोलियो पर स्ट्रेस बढ़ सकता है। इसके अलावा, MarketsMOJO ने हाल ही में तकनीकी कमजोरियों और अंडरपरफॉर्मेंस के चलते स्टॉक को 'Sell' रेटिंग दी है। मार्च 2026 में शेयर ने अपना 52-हफ्ते का निचला स्तर भी छुआ था। वहीं, बैंक की कंटिंजेंट लायबिलिटीज (Contingent Liabilities) ₹1,51,986 करोड़ है, और Return on Assets (RoA) 1.01% है, जो SBI के 1.19% से कम है।