Central Bank of India ने सितंबर तिमाही के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं, जिसमें बैंक का नेट प्रॉफिट **21%** बढ़कर **₹1,469 करोड़** पर पहुंच गया है। लोन ग्रोथ में आई तेजी ने नतीजों को मजबूती दी है, हालांकि डिपॉजिट ग्रोथ की सुस्त रफ्तार और घटते CASA रेशियो पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
मुनाफे के पीछे का गणित
सितंबर तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले 21.1% बढ़कर ₹1,469 करोड़ रहा। इस मुनाफे के पीछे मुख्य हाथ नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) का रहा, जो 26.3% की बढ़त के साथ ₹4,146 करोड़ तक पहुंच गई। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी पिछले साल के 2.89% से बढ़कर 3.01% हो गया है, जो साबित करता है कि बैंक ने कॉम्पिटिटिव मार्केट में अपने ब्याज स्प्रेड को बेहतरीन तरीके से मैनेज किया है।
लोन बुक में तूफानी तेजी
बैंक के परफॉर्मेंस की रीढ़ उसकी लोन ग्रोथ रही। ग्लोबल एडवांसेज 29.8% बढ़कर ₹3.81 लाख करोड़ हो गए हैं। रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME सेक्टर में आई 21.1% की सालाना बढ़ोतरी ने बैंक की कमाई बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Cautionary Notes)
हालांकि क्रेडिट ग्रोथ 30% के करीब रही, लेकिन डोमेस्टिक डिपॉजिट्स में सिर्फ 14.4% की बढ़ोतरी (कुल ₹5.09 लाख करोड़) देखी गई। इसके अलावा, CASA रेशियो 46.83% से घटकर 44.65% हो गया है। जानकारों का मानना है कि घटता CASA रेशियो बैंक को महंगे टर्म डिपॉजिट्स पर निर्भर रहने को मजबूर कर सकता है, जिससे आने वाली तिमाहियों में मार्जिन पर दबाव बन सकता है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक ने अपनी बैलेंस शीट को काफी साफ किया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 2.39% पर आ गए हैं, जबकि नेट NPA 0.31% रह गए हैं। बैंक ने अपना प्रोविजन कवरेज रेशियो 97.16% पर रखा है, जो काफी सुरक्षित माना जाता है। फिलहाल बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 17.68% है, जो भविष्य के विस्तार के लिए पर्याप्त है। अब देखना यह होगा कि बैंक कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो (58.95%) को कैसे मैनेज करता है और डिपॉजिट मोबिलाइजेशन को कैसे तेज करता है।
