Central Bank of India: शेयर ₹3,500 करोड़ की रिकवरी के टारगेट पर, पर निवेशक क्यों बेचैन? जानिए वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
Central Bank of India: शेयर ₹3,500 करोड़ की रिकवरी के टारगेट पर, पर निवेशक क्यों बेचैन? जानिए वजह
Overview

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) ने अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) तक ₹3,500 करोड़ की नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) की वसूली का लक्ष्य रखा है। इसके बावजूद, कंपनी का शेयर लगातार 52-हफ्ते के निचले स्तर को छू रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है, यह समझना ज़रूरी है।

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वैल्यूएशन का अजीब खेल

फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में नेट प्रॉफिट में 15.43% की सालाना बढ़ोतरी के बावजूद, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) निवेशकों का भरोसा जीतने में नाकामयाब रहा है। हाल ही में, बैंक के शेयर ने 52-हफ्ते का नया निचला स्तर छुआ है, जो कि बाज़ार के बाकी स्टॉक्स से बिल्कुल अलग चाल दिखा रहा है। बैंक मैनेजमेंट जहाँ 2.67% के ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेश्यो का ज़िक्र कर रहा है, जो कि पिछले सालों के मुकाबले काफी कम है, वहीं बाज़ार इस पर यकीन नहीं कर रहा।

बैंक का शेयर अभी अपनी बुक वैल्यू का लगभग 0.7 गुना और P/E रेश्यो के लिहाज़ से लगभग 6.0 के मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन दर्शाता है कि निवेशक इसे ग्रोथ की कहानी के बजाय एक 'वैल्यू ट्रैप' (Value Trap) के तौर पर देख रहे हैं। ऐसा लगता है कि बड़े निवेशक, बैंक के सुधरते ऑपरेशनल मेट्रिक्स के बावजूद, कुछ छुपे हुए सिस्टमिक रिस्क को नज़रअंदाज़ नहीं कर पा रहे हैं।

रिकवरी स्ट्रैटेजी या पुरानी राह?

FY27 के लिए ₹3,500 करोड़ की वसूली का लक्ष्य, वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम और SARFAESI जैसे तरीकों पर काफी हद तक निर्भर है। टेक्निकली राइट-ऑफ (Technically Written-off) हो चुके खातों में लगभग ₹32,000 करोड़ की रकम पड़ी है, जिसका मतलब है कि बैंक अपनी पुरानी बैलेंस शीट की दिक्कतों से ही मौजूदा प्रॉफिटेबिलिटी को फंड कर रहा है। FY26 में बैंक ने ₹8,479 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट (Operating Profit) दर्ज किया, लेकिन वसूली पर यह निर्भरता बताती है कि सिर्फ ब्याज से होने वाली कमाई में ग्रोथ एक चुनौती बनी हुई है।

फाइनेंशियल ईयर के दूसरे हाफ में क्रेडिट कार्ड और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे बिज़नेस शुरू करने की योजना, फी-बेस्ड इनकम (Fee-based Income) की ओर एक ज़रूरी कदम है। लेकिन, बैंक को इस हाई-मार्जिन सेगमेंट में प्राइवेट बैंकों से कड़ी टक्कर मिलेगी, जिन्होंने पहले ही इस बाज़ार पर अपनी पकड़ बना रखी है।

मंदी की आशंकाएं (Bear Case)

बैंक के हालिया परफॉर्मेंस को गहराई से देखें तो कुछ स्ट्रक्चरल कमज़ोरियां नज़र आती हैं। हालांकि Q4 FY26 में नेट प्रॉफिट में गिरावट एक बार के डेफर्ड टैक्स एसेट एडजस्टमेंट (Deferred Tax Asset Adjustment) की वजह से आई थी, लेकिन चिंता का मुख्य कारण इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (Interest Coverage Ratio) का कम होना और पहले के ऊंचे स्लिपेज (Slippages) हैं।

दूसरे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों के उलट, जो रिटेल और कॉर्पोरेट प्रोफाइल में बदलाव कर चुके हैं, यह बैंक अभी भी अपने पुराने एसेट बुक को ठीक करने में लगा है। एनालिस्ट्स का यह भी मानना है कि बैंक का रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity) प्राइवेट बैंकों के मुकाबले मामूली है। ऐसे में, अगर मैक्रोइकॉनॉमिक हेडविंड्स (Macroeconomic Headwinds) जैसे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी या सेक्टर-वाइड डिमांड में कमी आती है, तो बैंक के MSME और एग्रीकल्चर लोन पोर्टफोलियो पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

भविष्य की राह

बैंक मैनेजमेंट का कॉन्फिडेंस बना हुआ है। उनका अनुमान है कि FY27 में डिपॉजिट ग्रोथ 10-12% और एडवांसेज ग्रोथ (Advances Growth) 14-16% रह सकती है। RBI की अगली मॉनेटरी पॉलिसी का फैसला एक बड़ा फैक्टर होगा, क्योंकि बैंक के इंटरेस्ट-सेंसिटिव एसेट्स लिक्विडिटी और इन्फ्लेशन की चाल के प्रति काफी संवेदनशील हैं।

फिलहाल 4% का डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए कुछ राहत दे सकता है। लेकिन, शेयर के रेंज-बाउंड (Range-bound) रहने की संभावना है, जब तक कि बाज़ार को नए बिज़नेस लाइन्स से यह साबित न हो जाए कि वे बैंक के पुराने, कैपिटल-इंटेंसिव ऑपरेशंस की भरपाई कर सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.