क्यों गिरी कमाई, कहां दिखी मजबूती?
इस तिमाही में मुनाफे में आई भारी गिरावट की मुख्य वजह एकमुश्त ₹632 करोड़ की डेफर्ड टैक्स लायबिलिटी और 32% की कमी वाली ट्रेजरी इनकम रही। वहीं, दूसरी ओर बैंक के मुख्य बैंकिंग बिज़नेस ने शानदार प्रदर्शन किया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 17.8% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो ₹4,002 करोड़ पर पहुंच गई। इस स्ट्रॉन्ग NII ग्रोथ से पता चलता है कि बैंक की लेंडिंग एक्टिविटीज़ बढ़ी हैं। एकमुश्त खर्चों को छोड़ दें तो बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 4.6% बढ़कर ₹2,096 करोड़ रहा।
बैलेंस शीट मजबूत, एसेट क्वालिटी स्थिर
बैंक की बैलेंस शीट में भी ग्रोथ देखने को मिली। FY26 के अंत तक कुल डिपॉजिट 13.38% की तेज़ी के साथ ₹4.67 ट्रिलियन हो गए। ग्रॉस एडवांसेज में भी 9.75% का इजाफा हुआ, जो लोन देने की बैंक की क्षमता को दर्शाता है। एसेट क्वालिटी की बात करें तो ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेश्यो तिमाही-दर-तिमाही मामूली सुधरकर 2.67% पर आ गया।
डिविडेंड का ऐलान और बड़ा कैपिटल रेज़ प्लान
बैंक ने अपने शेयरधारकों को खुश करते हुए FY26 के लिए 6% (₹0.60 प्रति शेयर) का चौथा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। आने वाले समय में अपनी ग्रोथ को सपोर्ट करने और रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया FY27 में ₹7,000 करोड़ तक की कैपिटल जुटाने की योजना बना रहा है। इसके लिए बैंक FPO, राइट्स इश्यू या QIP जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है।
वैल्यूएशन और आगे की राह
वर्तमान में, बैंक का P/E रेश्यो लगभग 6.8x (TTM) है, जो इसे 'वैल्यू स्टॉक' की श्रेणी में रखता है। बाज़ार विश्लेषक इस पर बंटी हुई राय रखते हैं, जहाँ कुछ 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस बढ़ा रहे हैं, वहीं कुछ तकनीकी कमजोरियों की ओर इशारा कर रहे हैं। बैंक को अपनी कैपिटल रेज योजना के चलते शेयर डाइल्यूशन और फंड की बढ़ती लागत के चलते मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, बैंक का अनुमान है कि उसका नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3% से ऊपर बना रहेगा।
