फिनटेक कंपनी Cashfree Payments ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में **52%** की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कि **₹967 करोड़** रहा। इस दौरान कंपनी का नेट लॉस भी घटकर **₹118.5 करोड़** रह गया।
फिनटेक कंपनी की जोरदार वापसी
Cashfree Payments ने वित्त वर्ष 2026 (जो मार्च 2026 में समाप्त हुआ) के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 52% बढ़कर ₹967 करोड़ तक पहुंच गया है। यह कंपनी के लिए एक बड़ी वापसी का संकेत है, क्योंकि पिछले कुछ समय से ग्रोथ थोड़ी धीमी थी।
घाटे में कमी और ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी
रेवेन्यू ग्रोथ के साथ-साथ, कंपनी ने अपने नेट लॉस को भी कम करने में सफलता हासिल की है। FY26 में नेट लॉस घटकर ₹118.5 करोड़ रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹154 करोड़ था। कंपनी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि मार्च 2026 में ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी (EBITDA के आधार पर) हासिल करना रही। इसका मतलब है कि कंपनी का मुख्य बिजनेस अब ब्याज, टैक्स और अन्य खर्चों से पहले कमाई करने में सक्षम हो गया है।
इस दौरान कंपनी का कुल खर्च करीब 37% बढ़कर ₹1,091 करोड़ हो गया। कंपनी के मुताबिक, इसमें एक बड़ा हिस्सा पेमेंट गेटवे प्रोसेसिंग फीस का है, जो सीधे तौर पर हैंडल किए गए ट्रांजैक्शन वॉल्यूम से जुड़ा है। जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ता है, इन प्रोसेसिंग कॉस्ट को मैनेज करना एक अहम फैक्टर बना रहेगा।
रेगुलेटरी पाबंदियों से मिली राहत
यह शानदार रिकवरी ऐसे समय में आई है जब कंपनी कुछ मुश्किलों का सामना कर रही थी। पहले, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से पेमेंट एग्रीगेटर्स पर नए मर्चेंट ऑनबोर्ड करने पर लगी रोक के कारण कंपनी की ग्रोथ प्रभावित हुई थी। लेकिन, जैसे ही यह रोक हटाई गई, Cashfree ने अपने मर्चेंट बेस का तेजी से विस्तार किया है। वर्तमान में, कंपनी के पास RBI के तीन मुख्य लाइसेंस हैं: पेमेंट एग्रीगेटर, पेमेंट एग्रीगेटर-क्रॉस बॉर्डर, और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट।
हालांकि, इस रिकवरी के बावजूद, फिनटेक सेक्टर के अन्य प्लेयर्स की तरह Cashfree Payments भी रेगुलेटरी निगरानी में है। मार्च 2026 में, कंपनी पर एस्क्रो अकाउंट से जुड़े अनुपालन मुद्दों के कारण RBI ने ₹3.1 लाख का जुर्माना लगाया था। ऐसे रेगुलेटरी कदम फिनटेक फर्मों के लिए सख्त अनुपालन मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता की याद दिलाते हैं।
रणनीति और नेतृत्व
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, क्राफ्टन और वाई-कॉम्बिनेटर जैसे बड़े निवेशकों के समर्थन वाली Cashfree Payments, इस ग्रोथ को सहारा देने के लिए अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत कर रही है। इसी साल, कंपनी ने पूर्व वीज़ा एग्जीक्यूटिव समीर गांधी को अपना नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे कंपनी की फाइनेंशियल प्लानिंग को स्केल करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, क्योंकि कंपनी 'ग्रोथ एट ऑल कॉस्ट' मॉडल से हटकर सस्टेनेबिलिटी पर जोर दे रही है।
कंपनी पर नजर रखने वाले निवेशक यह देखना चाहेंगे कि क्या वे आने वाले वित्त वर्ष में अपनी नई ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी को बनाए रख पाते हैं या नहीं। मुख्य बातों में मर्चेंट बेस को बढ़ाना, प्रोसेसिंग कॉस्ट को प्रभावी ढंग से मैनेज करना और बदलते वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन करना शामिल रहेगा।
