Capri Global का बड़ा दांव: पहली बार जुटाएगी **$50 करोड़** का फंड, डॉलर बॉन्ड जारी करने की तैयारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Capri Global का बड़ा दांव: पहली बार जुटाएगी **$50 करोड़** का फंड, डॉलर बॉन्ड जारी करने की तैयारी

Capri Global Capital ने अपने पहले डॉलर-डिनोमिनेटेड बॉन्ड इश्यू के जरिए **$50 करोड़** तक जुटाने की योजना बनाई है। इस कदम का मकसद घरेलू बैंकों पर निर्भरता कम करना और अपने कर्ज के पोर्टफोलियो को विविधता देना है।

डॉलर मार्केट में पहली एंट्री

Capri Global Capital ने अपने पहले विदेशी मुद्रा बॉन्ड सेल के जरिए $30 करोड़ से $50 करोड़ तक जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कंपनी की पहली अंतरराष्ट्रीय डेट मार्केट में एंट्री है, जो इसके फंड जुटाने के तरीके में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। ये बॉन्ड्स 3 साल और 3 महीने की मैच्योरिटी वाले 'सीनियर सिक्योर्ड नोट्स' हैं, जिन्हें 7.75% की शुरुआती प्राइस गाइडेंस के साथ पेश किया जा रहा है।

क्यों है यह कदम जरूरी?

यह इश्यू कंपनी के $1 बिलियन के बड़े ग्लोबल मीडियम टर्म नोट (GMTN) प्रोग्राम का हिस्सा है। इस कदम से NBFC का लक्ष्य भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर अपनी निर्भरता घटाकर कैपिटल मार्केट से कर्ज की हिस्सेदारी को 40% से 50% के बीच ले जाना है।

रेटिंग और रिस्क फैक्टर

Fitch Ratings ने इन नोट्स को 'BB-(EXP)' की रेटिंग दी है। फिलहाल कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में लगभग ₹4,0110 करोड़ (₹401.1 बिलियन) रहा है।

हालांकि, डॉलर में कर्ज लेने से 'करेंसी रिस्क' भी बढ़ गया है। चूंकि कंपनी की कमाई भारतीय रुपयों में है, इसलिए उसे डॉलर के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए 'हेजिंग' (Hedging) करनी होगी, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ सकता है। मार्च 2026 तक कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 3.7x था, जिसे मैनेज करना मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। निवेशक अब इस इश्यू की फाइनल प्राइसिंग और डिमांड पर नज़र बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे पहले जून में भी कंपनी ने बाजार में उतरने की कोशिश की थी, लेकिन सही कीमत न मिलने के कारण उसे पीछे हटना पड़ा था।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.