Canara Bank आक्रामक विस्तार की राह पर है। कंपनी **₹47,000 करोड़** के लोन पाइपलाइन के दम पर **19%** की क्रेडिट ग्रोथ बनाए रखने की तैयारी में है, लेकिन डिपॉजिट और लोन के बीच बढ़ता अंतर निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
कॉर्पोरेट लेंडिंग में तेजी
बैंक का कॉर्पोरेट लोन पाइपलाइन इस समय ₹47,000 करोड़ का है, जिसमें ₹30,000 करोड़ की मंजूरशुदा सुविधाएं (sanctioned facilities) शामिल हैं, जबकि ₹17,000 करोड़ अभी समीक्षा के अधीन हैं। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण कंपनियां अब बाजार के बजाय बैंक लोन को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसका सीधा फायदा Canara Bank को मिल रहा है।
आंकड़ों की जुबानी
दूसरी तिमाही में बैंक ने 19.5% की सालाना क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की है, जिससे बैंक का कुल एडवांस ₹13.75 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। बैंक ने FCNR-B रणनीति का इस्तेमाल करते हुए $5.8 बिलियन की डिपॉजिट जुटाई है।
लिक्विडिटी की चुनौती
आक्रामक लेंडिंग के चलते बैंक के क्रेडिट और डिपॉजिट ग्रोथ के बीच का अंतर 640 बेसिस पॉइंट्स तक पहुंच गया है। इस गैप को भरने के लिए मैनेजमेंट अब डिपॉजिट ग्रोथ को 13% से ऊपर ले जाने पर जोर दे रहा है।
नए नियमों का असर
अगले फाइनेंशियल ईयर से लागू होने वाले 'Expected Credit Loss' (ECL) फ्रेमवर्क की भी तैयारी जोरों पर है। इसके तहत बैंक को भविष्य के संभावित नुकसान के लिए ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ तक का प्रोविजनिंग अलग रखना पड़ सकता है। हालांकि, मैनेजमेंट को भरोसा है कि बैंक का ROA 1% से ऊपर बना रहेगा और नेट इंटरेस्ट इनकम इस दबाव को संभालने में मदद करेगी।
