RAM Loans से मार्जिन बढ़ाने की रणनीति
Canara Bank के सीईओ हार्दिक सिंह अहलूवालिया के मुताबिक, बैंक अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को बेहतर बनाने के लिए रिटेल, एग्रीकल्चर और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (RAM) सेगमेंट के लोन पर फोकस बढ़ा रहा है। बैंक का मकसद है कि कुल एडवांसेज़ (Advances) में RAM पोर्टफोलियो का हिस्सा लगभग 60% तक ले जाया जाए। इसमें हाउसिंग, व्हीकल और गोल्ड लोन की ग्रोथ से मदद मिलेगी। Canara Bank ने चौथी तिमाही (Q4 FY26) में RAM ग्रोथ और बेहतर प्राइसिंग के दम पर NIM में 9 बेसिस पॉइंट का सुधार दर्ज किया था। हालांकि, बैंक का खुद का अनुमान है कि FY27 के लिए NIM 2.5-2.6% के बीच रह सकती है, जो FY26 के अनुमानित 2.75-2.8% से कम है। यह दर्शाता है कि RAM सेगमेंट में ग्रोथ के बावजूद मार्जिन सुधार की राह आसान नहीं दिख रही है।
मार्जिन पर दबाव और नए क्रेडिट नियमों का भारी खर्च
Canara Bank के Q4 FY26 नतीजों में NIM 2.51% तक पहुंची थी, जिसमें RAM ग्रोथ और डिपॉजिट्स में 9.71% की बढ़ोतरी का बड़ा योगदान था। लेकिन, FY27 के लिए 2.5-2.6% की NIM गाइडेंस यह इशारा करती है कि लोन की लागत में कमी आने की उम्मीदों के बावजूद मार्जिन या तो स्थिर रह सकता है या थोड़ा गिर सकता है। एक और बड़ा फैक्टर है लोन के नुकसान के लिए नए अकाउंटिंग नियम, जिन्हें Expected Credit Loss (ECL) नॉर्म्स कहा जाता है। Canara Bank को उम्मीद है कि स्टेज 2 एसेट्स के लिए अतिरिक्त ₹2,500 करोड़ का प्रोविज़न (Provision) करना होगा, जो कुल मिलाकर ₹5,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। बैंक मैनेजमेंट का कहना है कि यह उनके मजबूत 17.04% कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) पर 1-1.2% का असर डालेगा, लेकिन यह एक बड़ा प्रोविज़निंग खर्च होगा जो नतीजों पर असर डाल सकता है।
गोल्ड लोन बिजनेस में कड़ी…
Canara Bank के पास लगभग ₹2.45 लाख करोड़ का बड़ा गोल्ड लोन पोर्टफोलियो है, जिसके FY27 में 15% से ज़्यादा बढ़ने की उम्मीद है। बैंक का कहना है कि वे RBI के नए नियमों का पालन कर रहे हैं और लोन-टू-वैल्यू रेशियो 70% से नीचे बनाए हुए हैं। लेकिन, यह मार्केट बेहद कॉम्पिटिटिव है। भले ही बैंकों की गोल्ड लोन मार्केट में हिस्सेदारी 39% हो गई है, लेकिन नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) अब भी 61% हिस्सेदारी के साथ आगे हैं। Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसी बड़ी NBFCs के साथ-साथ SBI, HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बैंक भी इस बिजनेस के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। यह कॉम्पिटिशन लोन यील्ड्स पर दबाव डाल सकता है, जिससे RAM ग्रोथ से होने वाले फायदे कुछ हद तक कम हो सकते हैं।
साथी बैंकों के मुकाबले वैल्यूएशन पीछे
Canara Bank का मौजूदा प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 6.04-6.60 के आसपास है। यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के लगभग 11.60 और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स के औसत 8.15 की तुलना में काफी कम है। जबकि कुछ एनालिस्ट्स इसे वैल्यू के लिहाज से आकर्षक मान रहे हैं, यह मार्केट की सावधानी को भी दर्शाता है। 5 साल में 320% से ज़्यादा का रिटर्न देने के बावजूद, स्टॉक 13 मई, 2026 तक साल-दर-साल लगभग 16% गिर चुका है। Bank of Baroda का P/E रेशियो भी करीब 6.79 है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर में FY27 के लिए 11-13% के क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन डिपॉजिट्स के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा फंड की लागत बढ़ा सकती है।
एनालिस्ट्स की चिंताएं और शेयर का परफॉरमेंस
मैनेजमेंट के आशावाद के बावजूद, कई फैक्टर संभावित चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। FY27 में कम NIMs का अनुमान, भले ही RAM लोन बढ़ रहे हों, मार्जिन रिकवरी की गति पर सवाल उठाता है। ECL नियमों के तहत बड़ा प्रोविज़निंग खर्च, जो कैपिटल बफर में मैनेज हो सकता है, सीधे मुनाफे को प्रभावित करेगा। गोल्ड लोन सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा से यील्ड में अपेक्षित बढ़ोतरी कम हो सकती है। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है: Motilal Oswal ने ₹160 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी है, वहीं Morgan Stanley ₹103 के टारगेट के साथ 'Underweight' है। MarketsMOJO ने 8 मई, 2026 को मार्केट के बदलते रुझान और मिले-जुले टेक्निकल संकेतों के चलते स्टॉक को 'Hold' पर डाउनग्रेड कर दिया था, बावजूद इसके कि लंबी अवधि में इसका प्रदर्शन मजबूत रहा है। ब्रॉडर मार्केट की तुलना में स्टॉक का साल-दर-साल कम प्रदर्शन इन चिंताओं को उजागर करता है।
डिजिटल में निवेश और भविष्य की राह
Canara Bank टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहा है, जिसमें साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ऐप को बेहतर बनाने के लिए ₹320 करोड़ का आवंटन शामिल है। मैनेजमेंट को भरोसा है कि वे FY27 के लिए 11-12% के लोन ग्रोथ गाइडेंस को पार कर लेंगे, खासकर कोर RAM सेगमेंट में। बैंक नए ECL नॉर्म्स के ट्रांजीशन को सुचारू रूप से मैनेज करने की उम्मीद करता है और सालाना प्रॉफिटेबिलिटी ₹19,000 करोड़ से ऊपर बनाए रखने का अनुमान लगाता है। हालांकि, टिकाऊ NIM ग्रोथ हासिल करने के लिए RAM एक्सपोजर को सफलतापूर्वक बढ़ाना, ECL प्रोविज़निंग के असर को संतुलित करना और प्रमुख क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा से निपटना, इसके भविष्य के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
