Canara Bank सितंबर महीने में Basel III-compliant Additional Tier-1 (AT-1) बॉन्ड के जरिए **₹4,500 करोड़** जुटाने की योजना बना रहा है। इसका मकसद बैंक के कैपिटल बफर को मजबूत करना है।
बैंक का फंड जुटाने का बड़ा प्लान
Canara Bank अपनी बैलेंस शीट को मजबूती देने के लिए मार्केट से पूंजी जुटाने की तैयारी में है। बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कुल ₹8,500 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है, जिसका एक हिस्सा ₹4,500 करोड़ के ये बॉन्ड होंगे। इस फंड का मुख्य उद्देश्य क्रेडिट ग्रोथ को रफ्तार देना और रेगुलेटरी नियमों का पालन करना है।
इस खबर के बाद बाजार में उत्साह देखा गया और 10 सितंबर, 2026 को बैंक के शेयर में 2.49% की तेजी दर्ज की गई।
क्या होते हैं AT-1 बॉन्ड?
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि AT-1 बॉन्ड आम डेट इंस्ट्रूमेंट से अलग होते हैं। ये 'परपेचुअल' (Perpetual) होते हैं, यानी इनकी कोई फिक्स मैच्योरिटी नहीं होती, हालांकि बैंक के पास 5 साल बाद इन्हें रिडीम करने का 'कॉल ऑप्शन' होता है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने इन्हें 'AA+ (Stable)' रेटिंग दी है।
रिस्क फैक्टर और सावधानियां
हालांकि ये बॉन्ड आकर्षक लगते हैं, लेकिन इनमें कुछ रिस्क भी शामिल हैं। अगर बैंक का कैपिटल रेशियो एक तय सीमा से नीचे गिरता है, तो रेगुलेटर बैंक को कूपन पेमेंट रोकने या नुकसान की भरपाई के लिए प्रिंसिपल अमाउंट को राइट-डाउन (Write-down) करने के लिए कह सकता है। फिलहाल, बैंक के मैनेजमेंट के लिए सही कूपन रेट तय करना और मार्केट की डिमांड को समझना बड़ी चुनौती होगी।
