Canara Bank के लिए यह मिला-जुला समय है। बैंक ने सितंबर तिमाही में **₹5,175 करोड़** का शानदार मुनाफा कमाया है और लोन ग्रोथ **17.97%** रही है। हालांकि, बॉन्ड यील्ड के बढ़कर **7.38%** तक पहुंचने से बैंक के निवेश पोर्टफोलियो पर दबाव बढ़ गया है, जिससे प्रोविजनिंग का रिस्क बना हुआ है।
Canara Bank इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ बैंक अपने लोन बिजनेस को तेजी से बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ बॉन्ड मार्केट की अस्थिरता ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। जून में बॉन्ड यील्ड करीब 6.75% थी, जो अब बढ़कर 7.38% पर पहुंच गई है। ब्याज दरों में इस बढ़त का सीधा असर फिक्स्ड-रेट बॉन्ड की मार्केट वैल्यू पर पड़ता है, जिसके चलते बैंक को अपने बैलेंस शीट पर 'मार्क-टू-मार्केट' प्रोविजनिंग करनी पड़ सकती है। बैंक के एमडी और सीईओ ब्रजेश कुमार सिंह का कहना है कि वे इन स्थितियों पर नजर रखे हुए हैं ताकि आने वाले महीनों में फाइनेंशियल स्थिति पर पड़ने वाले असर को आंका जा सके।
त्योहारी सीजन और कर्ज में उछाल
ट्रेजरी में आ रही दिक्कतों के बावजूद, बैंक का कोर लैंडिंग बिजनेस बहुत मजबूत नजर आ रहा है। बैंक का फोकस इस समय फेस्टिव सीजन की डिमांड पर है, खासकर होम और व्हीकल लोन कैटेगरी में। इसी आक्रामक रणनीति के चलते बैंक की एडवांसेज ग्रोथ 17.97% रही है, जो बैंक के शुरुआती अनुमानों से भी बेहतर है। NBFCs से मिलने वाली कड़ी टक्कर को देखते हुए बैंक ने नए लोन पर प्रोसेसिंग फीस को माफ करने जैसे लुभावने ऑफर भी पेश किए हैं।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस और फंडिंग रणनीति
सितंबर तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट ₹5,175 करोड़ दर्ज किया गया। निवेशकों की नजर जिस नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर रहती है, उसे बैंक ने 2.55% पर स्थिर रखा है, जो यह दर्शाता है कि बैंक डिपॉजिट्स और लोन की ब्याज दरों के बीच अच्छा तालमेल बिठाए हुए है। इसके अलावा, लिक्विडिटी मजबूत करने के लिए बैंक ने लगभग ₹55,000 करोड़ के फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट डिपॉजिट जुटाए हैं। ये फंड बैंक को लागत कम करने और स्टैच्यूटरी रिजर्व की जरूरतों से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
आगे चलकर बैंक का पूरा जोर डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर होगा। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि बॉन्ड यील्ड में होने वाली हलचल को बैंक अपने कोर बिजनेस के जरिए कैसे मैनेज करता है।
