कर्नाटक स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने Canara Bank के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बैंक को अब चोरी हुए गिरवी गहनों के लिए सिर्फ सोने का दाम नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज और पत्थरों की कीमत भी चुकानी होगी।
कर्नाटक स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने गोल्ड लोन (Gold Loan) को लेकर एक सख्त रुख अपनाते हुए बैंकों की जवाबदेही तय कर दी है। एक मामले में Canara Bank को आदेश दिया गया है कि यदि बैंक के पास रखा गिरवी सोना चोरी होता है, तो बैंक सिर्फ सोने के वजन का ही भुगतान नहीं कर सकता। उसे गहने बनाने की मजदूरी यानी 'मेकिंग चार्ज' और उसमें जड़े कीमती पत्थरों की लागत भी ग्राहक को देनी होगी।
क्या था पूरा मामला?
तुमकुर (Tumkur) के एक ग्राहक ने बैंक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। चोरी के बाद, बैंक ने केवल सोने के नेट वजन के आधार पर मुआवजे की पेशकश की थी, यह तर्क देते हुए कि ग्राहक के पास मेकिंग चार्ज का बिल नहीं है। हालांकि, कमीशन ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि बैंक संपत्ति का कस्टोडियन है और उसे ग्राहक को उसके पहले वाली आर्थिक स्थिति में वापस लाना होगा।
बैंक के लिए क्यों है यह झटका?
यह फैसला बैंक के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो के रिस्क मैनेजमेंट पर सवाल खड़ा करता है। गोल्ड लोन बैंकों के लिए हमेशा से एक हाई-मार्जिन प्रोडक्ट रहा है, लेकिन अब सुरक्षा और ऑडिट में लापरवाही का खामियाजा बैंकों को अपनी जेब से भुगतना पड़ सकता है।
RBI की बढ़ती सख्ती
निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Gold Loan सेक्टर पहले से ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की रडार पर है। साल 2026 की शुरुआत में RBI ने सख्त गाइडलाइन्स जारी की थीं। महाराष्ट्र में हुए गोल्ड फ्रॉड के बाद, जहां असली सोने की जगह नकली गहने पाए गए थे, बैंकों को सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना पड़ सकता है। अब कानूनी देनदारी बढ़ने से बैंक के ऑपरेटिंग खर्चों (Operating Expenses) पर सीधा असर पड़ने की आशंका है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
