Canara Bank और अन्य लेंडर्स ने Subhash Chandra के रिपेमेंट प्लान को NCLAT में चुनौती दी है। मामला दिल्ली की एक प्रॉपर्टी से जुड़ा है, जहाँ **₹22,006 करोड़** के दावों पर **99.9%** का हेयरकट प्रस्तावित था। फिलहाल NCLT ने सेटलमेंट पर स्टे लगा दिया है और एसेट की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है।
विवाद की जड़: प्रॉपर्टी का पेंच
Canara Bank ने Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। विवाद का मुख्य केंद्र नई दिल्ली के भगवान दास रोड पर स्थित 2.8 एकड़ की प्रॉपर्टी है। बैंक का आरोप है कि Subhash Chandra ने पहले इसे एक स्वतंत्र कंपनी 'Greatway Estates' की संपत्ति बताया था, लेकिन अपने रिपेमेंट प्लान में उन्होंने इस प्रॉपर्टी की बिक्री से मिली रकम को कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करने की बात कही है। बैंक इस विरोधाभास को बड़ी अनियमितता मान रहे हैं।
रिकवरी का गणित और लेंडर्स का विरोध
यह पूरा मामला Essel Group की इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया से जुड़ा है। लेंडर्स, जिनमें Canara Bank, Union Bank और LIC Housing Finance शामिल हैं, ने रिपेमेंट प्लान का कड़ा विरोध किया है। प्लान में कुल ₹22,006 करोड़ के क्लेम के बदले केवल ₹6.5 करोड़ देने की बात कही गई थी। इसका मतलब है कि क्रेडिटर्स को 0.1% से भी कम की रिकवरी मिल रही थी, जिसे लेंडर्स ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
NCLT का सख्त एक्शन और CBI की एंट्री
NCLT की पांच सदस्यीय बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस रिपेमेंट प्लान पर रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने किसी भी तरह की एसेट सेल या ट्रांसफर पर मोरेटोरियम लगा दिया है। कानूनी मुश्किल तब और बढ़ गई जब 5 सितंबर 2026 को CBI ने Subhash Chandra के खिलाफ FIR दर्ज की। यह जांच ₹980 करोड़ के उन लोन से जुड़ी है, जिसमें आरोप है कि नेटवर्थ के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे।
अब निवेशकों और बाजार की नजरें 23 सितंबर 2026 पर टिकी हैं, जब NCLT इस रिपेमेंट प्लान की दोबारा समीक्षा करेगा।
