पूरे साल के नतीजे भी शानदार, पर वैल्यूएशन पर छिड़ी बहस
Can Fin Homes (CANF) ने पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में भी शानदार प्रदर्शन किया है। पूरे साल का PAT 27% बढ़कर ₹10.9 अरब रहा। वहीं, चौथी तिमाही में कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 21% बढ़कर ₹4.2 अरब दर्ज की गई।
वैल्यूएशन का पेंच: कहां फंसा है मामला?
हालांकि, शानदार नतीजों के बावजूद Can Fin Homes का वैल्यूएशन (Valuation) चिंता का विषय बना हुआ है। शेयर इस समय अपने FY27E अनुमानित आय के 1.8 गुना प्राइस-टू-बुक (P/B) वैल्यू पर ट्रेड कर रहा है। कुछ एनालिस्ट्स के टारगेट प्राइस FY28E के लिए 1.7 गुना P/BV का अनुमान लगा रहे हैं। यह प्रीमियम वैल्यूएशन ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal की 'Neutral' रेटिंग और ₹1,000 के टारगेट से काफी अलग है। दूसरी ओर, कई दूसरे एनालिस्ट्स CANFINHOME को 'Strong Buy' रेटिंग दे रहे हैं और ₹1,155 तक के टारगेट दे रहे हैं। यह दिखाता है कि वैल्यूएशन को लेकर बाजार में राय बंटी हुई है। हालांकि, कंपनी का P/E रेश्यो 11.2-12.4x है, जो पियर एवरेज 18.3x से कम है, लेकिन P/B वैल्यूएशन की चिंताएं बनी हुई हैं।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस और खर्चों पर एक नज़र
ऑपरेशनल परफॉरमेंस की बात करें तो, Q4 FY26 में प्रॉफिट बिफोर प्रोविजन्स (PPoP) 20% बढ़कर ₹3.5 अरब रहा, और पूरे साल के लिए यह 17% बढ़कर ₹13.4 अरब पर पहुंच गया। मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY27 में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) करीब 3.75% और स्प्रेड 2.75-2.8% के आसपास बना रहेगा। लेकिन, Q4 में ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस में करीब 24% की बढ़ोतरी हुई, जिससे कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो लगभग 19.8% पर आ गया। मैनेजमेंट का मानना है कि IT प्रोजेक्ट्स पर चल रहे खर्च के कारण FY27 में यह रेश्यो 19-19.5% के बीच बना रह सकता है, जो दक्षता (efficiency) पर थोड़ी दबाव डाल सकता है।
लोन बुक, जोखिम और सेक्टर का भविष्य
कंपनी का लोन बुक 10% बढ़कर ₹42,209 करोड़ हो गया, जिसमें 23% की बढ़ोतरी के साथ डिस्बर्समेंट्स ने मदद की। हालांकि, हैवी प्रीपेमेंट्स (high prepayments) के चलते एसेट ग्रोथ धीमी रही। कुछ अंडरलाइंग रिस्क (underlying risks) पर भी गौर करना जरूरी है। Can Fin Homes के प्रमोटर, Canara Bank की मार्च 2026 तक लगभग 30% की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। कंपनी अपनी फंडिंग का लगभग 62% बैंक से उधार लेती है, जो इसे डेट मार्केट में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है। एसेट क्वालिटी स्थिर है, ग्रॉस NPA 0.85% और नेट NPA 0.37% है, लेकिन FY26 की पहली छमाही में स्टेज 2 और स्टेज 3 एसेट्स में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जो पोर्टफोलियो के कुछ हिस्सों में संभावित दबाव का संकेत दे सकती है।
साथ ही, Can Fin Homes का नॉन-हाउसिंग लोन की ओर रणनीतिक बदलाव (जो अब बुक का 28% है) यील्ड बढ़ा सकता है, लेकिन यह अपने मुख्य हाउसिंग फाइनेंस बिजनेस की तुलना में एक अलग जोखिम प्रोफाइल लाता है। सेक्टर की बात करें तो, भारतीय हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में अगले दशक में 4.9% से 7% की CAGR से लगातार बढ़ोतरी की उम्मीद है। अर्बनाइजेशन, जनसांख्यिकी और सरकारी योजनाओं जैसे PMAY इसके मुख्य चालक हैं। सेक्टर को ब्याज दरों और रेगुलेशन में बदलावों से दबाव का सामना करना पड़ता है।
