सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) ने पब्लिक सेक्टर बैंकों को क्रेडिट मूल्यांकन (Credit Appraisal) और निगरानी (Monitoring) के लिए ट्रेनिंग को बेहतर बनाने का निर्देश दिया है। यह कदम बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते फाइनेंशियल फ्रॉड की रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जिसमें स्टाफ की ट्रेनिंग की कमी को एक बड़ी वजह बताया गया है। अब बैंकों को आंतरिक नियंत्रण (Internal Controls) को मजबूत करने और ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risks) को कम करने के लिए विशेष केस स्टडीज का इस्तेमाल करना होगा।
केस स्टडीज से ट्रेनिंग गैप को कैसे भरेंगे?
सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) ने पब्लिक सेक्टर बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक अहम निर्देश जारी किया है। कमीशन ने साफ किया है कि कर्मचारियों की ट्रेनिंग में कमी और बैंकिंग फ्रॉड में हो रही वृद्धि के बीच सीधा संबंध है। CVC ने पाया है कि लोन का मूल्यांकन (Loan Appraisal) और उसकी निगरानी (Monitoring) के तरीके में कर्मचारियों की कमजोरियां ही फ्रॉड करने वालों के लिए सबसे बड़े मौके बनाती हैं। इसलिए, इस सेक्टर में तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
यह निर्देश एडवाइजरी बोर्ड फॉर बैंकिंग एंड फाइनेंशियल फ्रॉड्स (ABBFF) के विश्लेषण के बाद आया है। बोर्ड ने हाल के कई फ्रॉड के मामलों की जांच की थी। जांच में 20 ऐसी विस्तृत केस स्टडीज सामने आईं, जिनसे साफ हुआ कि क्रेडिट मूल्यांकन (Credit Appraisal) और लोन की लगातार निगरानी (Ongoing Loan Monitoring) में गहरी जानकारी की कमी ही फ्रॉड करने वालों के लिए रास्ता खोलती है। अब CVC ने वित्तीय संस्थानों को इन केस स्टडीज को अपनी अनिवार्य ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल करने को कहा है। इसका मकसद सिर्फ किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर, कर्मचारियों को प्रैक्टिकल जानकारी देना है कि कैसे फाइनेंशियल अनियमितताएं की जाती हैं और उन्हें कैसे पकड़ा जा सकता है।
विजिलेंस कैंपेन और जवाबदेही
यह पहल 17 अगस्त से 16 नवंबर 2026 तक चलने वाले एक बड़े प्रिवेंटिव विजिलेंस कैंपेन (Preventive Vigilance Campaign) का हिस्सा है। यह कैंपेन 26 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले वार्षिक विजिलेंस अवेयरनेस वीक (Vigilance Awareness Week) तक चलेगा। क्रेडिट ट्रेनिंग के अलावा, CVC ने यह भी निर्देश दिया है कि संस्थाएं पेंडिंग शिकायतों का निपटारा करने, कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट (Contract Management) को बेहतर बनाने और शुरुआती जोखिमों को पकड़ने के लिए डिजिटल टूल्स (Digital Tools) का इस्तेमाल बढ़ाने को प्राथमिकता दें।
पब्लिक सेक्टर बैंक और अन्य वित्तीय संगठनों को अपनी प्रगति पर बारीकी से नजर रखनी होगी। इन संस्थानों के चीफ विजिलेंस ऑफिसर्स (Chief Vigilance Officers) को 30 नवंबर तक CVC को एक औपचारिक रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने और इन निवारक उपायों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा विवरण होगा।
निवेशकों के लिए, यह कदम इस बात पर जोर देता है कि रेगुलेटर पब्लिक सेक्टर बैंकों के आंतरिक ऑपरेशनल रिस्क (Internal Operational Risks) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यदि बेहतर ट्रेनिंग प्रोटोकॉल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भविष्य में खराब क्वालिटी के लोन स्वीकृत होने की संभावना कम होने से एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार हो सकता है। हालांकि, इस कदम की असल कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक इन केस स्टडीज को अपने दैनिक कामकाज में कितनी सख्ती से शामिल करते हैं और क्या ये उपाय आने वाली तिमाहियों में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Non-Performing Assets) को कम करने में मदद करते हैं।
