गोल्ड लोन से रॉकेट स्पीड, पर रिस्क भी,
बैंक के कुल एडवांसेज में 26% की शानदार बढ़ोतरी हुई, जो कि बैंकिंग सेक्टर की औसत 16% की ग्रोथ से काफी ज्यादा है। इस ग्रोथ की मुख्य वजह गोल्ड लोन में आई 53% की जबरदस्त उछाल है, जो अब बैंक के कुल लोन पोर्टफोलियो का 54% हिस्सा बन चुका है। वहीं, होलसेल लेंडिंग (Wholesale Lending) में भी 37% की अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। हालांकि, बैंक ने रिटेल लोन बुक को रणनीतिक तौर पर कम किया है, खासकर अनसिक्योर्ड लेंडिंग (Unsecured Lending) से पीछे हटकर। गोल्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव बैंक के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर बन सकता है।
एसेट क्वालिटी पर बढ़ती चिंता
लेकिन इस चमक के पीछे कुछ चिंताएं भी छिपी हैं। बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो 1.66% पर पहुंच गया है। यह पिछले तिमाही के 1.96% से कम है, लेकिन पिछले साल के 1.57% से ज्यादा है। यह लगातार बढ़ते एसेट क्वालिटी कंसर्न (Asset Quality Concerns) की ओर इशारा करता है। रिटेल लोन में कमी और SME लेंडिंग में धीमी रफ्तार से बैंक का एसेट बेस कम डायवर्सिफाइड और अधिक जोखिम भरा हो सकता है।
मार्जिन पर दबाव, डिपॉजिट ग्रोथ के बावजूद
बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ 20% रही, जो इंडस्ट्री के 13.5% से काफी बेहतर है। लेकिन, बैंक का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो (Credit-to-Deposit Ratio) 92% के हाई लेवल पर है। इस टाइट लिक्विडिटी (Tight Liquidity) और डिपॉजिट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव है। Q4 FY26 में NIMs 3.83% रहे, जो पिछले साल से थोड़ा अधिक है लेकिन पिछली तिमाही से मामूली कम। एनालिस्ट्स का मानना है कि स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) के लिए 4% से ऊपर NIMs जरूरी हैं, जबकि CSB Bank के NIMs 3.75% से 4% के बीच रहने का अनुमान है। महंगे टर्म डिपॉजिट्स (Term Deposits) का बढ़ता हिस्सा भी कॉस्ट प्रेशर बढ़ा रहा है।
मुनाफा और रिटर्न पर हेडविंड्स
रिटर्न रेश्यो (Return Ratios) में Q4 FY26 में सुधार दिखा, जिसमें रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) 1.53% और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 18% रहा। यह सुधार मुख्य रूप से प्रोविजन्स (Provisions) में कमी और पॉजिटिव ट्रेजरी इनकम (Treasury Income) के कारण हुआ। हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए RoA 1.3% रहा, जो मैनेजमेंट के 1.5% से 1.8% के गाइडेंस से कम है। नेट प्रॉफिट में मामूली 6% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ देखने को मिली, क्योंकि ट्रेजरी लॉसेस (Treasury Losses) ने कोर अर्निंग्स (Core Earnings) के उछाल को कुछ हद तक कम कर दिया।
हाई कॉस्ट और एनालिस्ट्स का आउटलुक
बैंक का कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो (CIR) भी 61.88% पर बना हुआ है, जो SFBs के लिए आदर्श बेंचमार्क से काफी ऊपर है। हालांकि, वैल्यूएशन के लिहाज से बैंक आकर्षक दिख रहा है। एनालिस्ट्स का भी मानना है कि मौजूदा लेवल्स पर 'Buy' की सलाह दी जा सकती है, जिसका टारगेट प्राइस ₹437 के आसपास है, जो 14% से ज्यादा का अपसाइड दिखा रहा है।
आगे की राह
आगे चलकर, CSB Bank के लिए डिपॉजिट की लागत को मैनेज करना, गोल्ड लोन पर निर्भरता कम करना और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) में सुधार करना बड़ी चुनौतियां होंगी। एनालिस्ट्स का पॉजिटिव आउटलुक (Analyst Outlook) भविष्य की उम्मीदें जगाता है, लेकिन बैंक के गाइडेंस मिस करने के इतिहास और SFBs से जुड़े सेक्टरियल रिस्क (Sectoral Risks) को देखते हुए आगे का रास्ता सावधानी भरा रहने वाला है।
