CSB Bank ने अपनी बिजनेस रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। बैंक अब गोल्ड लोन पर निर्भरता को कम कर **30%** पर लाने की योजना बना रहा है, हालांकि हाई डिपॉजिट कॉस्ट के कारण मार्जिन पर दबाव दिख रहा है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
CSB Bank अब अपने बिजनेस को री-स्ट्रक्चर करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बैंक की योजना 2030 तक गोल्ड लोन की हिस्सेदारी को मौजूदा 54% से घटाकर 30% तक लाने की है। इसके बजाय बैंक होलसेल और स्मॉल बिजनेस (SME) लोन पर फोकस करेगा। बैंक ने अपने टोटल एडवांस में 24% की ग्रोथ जरूर दर्ज की है, लेकिन यह ट्रांजिशन एक लंबी प्रक्रिया है।
मार्जिन और डिपॉजिट की चुनौती
बैंक के लिए सबसे बड़ी चुनौती नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) का दबाव है, जो हालिया तिमाही में 17 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 3.66% पर आ गया है। इसकी मुख्य वजह बैंक का महंगा 'बल्क डिपॉजिट' है, जो कुल डिपॉजिट का 42% है। वहीं, CASA रेश्यो गिरकर 19.4% पर पहुंच गया है, जिससे कॉस्ट ऑफ फंड्स बढ़कर 6.55% हो गया है। हालांकि, मैनेजमेंट को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही से मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।
प्रमोटर की अनिश्चितता
निवेशकों की नजर प्रमोटर 'Fairfax' पर भी टिकी है। बाजार में प्रमोटर की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर चल रही अटकलें शेयर के लिए 'टेक्निकल ओवरहैंग' बनी हुई हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में बिकवाली के डर से शेयर का भाव एक दायरे में फंसा रह सकता है।
एसेट क्वालिटी में मजबूती
राहत की बात यह है कि बैंक की एसेट क्वालिटी अब भी बेहतर है। अनसिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो महज 2% है और बैड लोन या स्लिपेज 1% से भी कम है। बैंक का प्रोविजन कवरेज रेश्यो 78% है, जो किसी भी वित्तीय तनाव से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा घेरा प्रदान करता है।
