CMR Green IPO: निवेशकों को आज मिलेगा अलॉटमेंट, क्या ग्रे मार्केट की तेजी बनी रहेगी?

BANKINGFINANCE
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AuthorMehul Desai|Published at:
CMR Green IPO: निवेशकों को आज मिलेगा अलॉटमेंट, क्या ग्रे मार्केट की तेजी बनी रहेगी?
Overview

CMR Green Technologies का **₹631 करोड़** का IPO, जो **127 गुना** सब्सक्राइब हुआ, आज अलॉटमेंट के लिए तैयार है। ग्रे मार्केट में ज़बरदस्त डिमांड के बावजूद, 100% ऑफर-फॉर-सेल (OFS) स्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर पर ज़्यादा निर्भरता चिंता का सबब है।

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अलॉटमेंट का दिन

CMR Green Technologies के ₹631 करोड़ के IPO का बिडिंग विंडो बंद हो गया है और अब निवेशकों की नज़रें आज होने वाले शेयर अलॉटमेंट पर टिकी हैं। 5 जून 2026 को बंद हुए इस पब्लिक इश्यू को 127 गुना से ज़्यादा का जबरदस्त सब्सक्रिप्शन मिला। रिटेल निवेशकों के साथ-साथ क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने भी इसमें खूब दिलचस्पी दिखाई, QIBs पोर्शन 270.46 गुना और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) का हिस्सा 172.35 गुना बुक हुआ। निवेशक KFin Technologies या BSE/NSE की वेबसाइट पर अपने अलॉटमेंट की पुष्टि कर सकते हैं।

वैल्यूएशन और मार्केट की चाल

नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी CMR Green Technologies, भारत की सर्कुलर इकोनॉमी का अहम हिस्सा है। कंपनी के 13 रीसाइक्लिंग प्लांट हैं और यह एल्युमिनियम अलॉय जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स बनाती है। यह Bajaj Auto और Hero MotoCorp जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों के लिए सप्लाई चेन पार्टनर का काम करती है। हालांकि, रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को पर्यावरण नियमों और हल्के मटेरियल की बढ़ती मांग से फायदा होने की उम्मीद है, पर निवेशकों को 35% से 37% के ग्रे मार्केट प्रीमियम से आगे भी देखना होगा। कंपनी का लिक्विड मेटल सप्लाई में विस्तार और जापानी कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप ग्रोथ की कहानी कहती है, लेकिन लिस्टिंग के दिन कंपनी पर मैक्रोइकोनॉमिक माहौल, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एनर्जी कॉस्ट का दबाव दिखेगा।

फॉरेंसिक बियर केस (खतरे के संकेत)

ज़बरदस्त सब्सक्रिप्शन के बावजूद, यह IPO पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) है। इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई पूरी रकम मौजूदा शेयरधारकों के लिए एग्जिट का ज़रिया बनेगी, कंपनी को डेट कम करने या बिजनेस बढ़ाने के लिए कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसके अलावा, कंपनी पर कंसंट्रेशन रिस्क भी काफी ज़्यादा है। कंपनी का लगभग 79% रेवेन्यू ऑटोमोटिव सेक्टर से आता है, जिससे यह सेक्टर की मंदी के प्रति बहुत संवेदनशील हो जाती है। पिछले कुछ फाइनेंशियल इयर्स में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसमें वर्किंग कैपिटल की ज़्यादा ज़रूरत और इंपोर्टेड स्क्रैप से जुड़े फॉरेन एक्सचेंज रिस्क का असर रहा है। टॉप 10 क्लाइंट्स से आने वाले रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा भी कंपनी को मार्जिन पर दबाव का सामना करा सकता है।

भविष्य की राह

अलॉटमेंट के बाद, कंपनी 10 जून 2026 को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, इश्यू की भारी सब्सक्रिप्शन की वजह से शेयरों की कमी का पॉजिटिव सेंटिमेंट है। लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों को कंपनी की क्लाइंट बेस को ऑटो सेक्टर से आगे डाइवर्सिफाई करने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का भरोसा कच्चे माल की कीमतों के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने की कंपनी की क्षमता और डोमेस्टिक सस्टेनेबिलिटी टारगेट्स को पूरा करने की उसकी प्रगति पर निर्भर करेगा। 2030 तक सेकेंडरी एल्युमिनियम मार्केट की पैठ 45% तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें CMR Green की लीडरशिप ग्रोथ को बढ़ावा दे सकती है, बशर्ते कंपनी अपने डेट-हैवी और लो-मार्जिन बिजनेस मॉडल के स्ट्रक्चरल रिस्क को सफलतापूर्वक पार कर ले।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.