RBI NPA Rules: MSMEs के लिए राहत की उम्मीद, CEA नागेश्वरन ने 90-दिन के नियम में बदलाव की वकालत की

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI NPA Rules: MSMEs के लिए राहत की उम्मीद, CEA नागेश्वरन ने 90-दिन के नियम में बदलाव की वकालत की

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने RBI से MSMEs के लिए NPA वर्गीकरण नियमों को बदलने की मांग की है। उनका तर्क है कि मौजूदा **90-दिन** का सख्त नियम छोटी कंपनियों पर समय से पहले आर्थिक बोझ डाल रहा है।

नियम में बदलाव क्यों जरूरी?

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने 21वें 'नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ इंक्लूसिव ग्रोथ' में साफ कहा कि मौजूदा बैंकिंग नियम MSMEs की कार्यशैली के अनुकूल नहीं हैं। वर्तमान में, किसी भी लोन अकाउंट को 30 दिनों की देरी के बाद स्पेशल मेंशन अकाउंट (SMA) माना जाता है और 90 दिनों की देरी पर उसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया जाता है। नागेश्वरन का मानना है कि यह 90-दिन की समय-सीमा बहुत ही कठोर है और यह छोटे व्यवसायों के कैश-फ्लो चक्र को नहीं समझती है।

छोटे उद्योगों पर क्या पड़ेगा असर?

सरकार का मानना है कि NPA का ठप्पा लगने से कंपनियां समय से पहले ही वित्तीय संकट में फंस जाती हैं, जिससे उन्हें भविष्य में क्रेडिट मिलने में दिक्कत आती है। यदि ये नियम लचीले होते हैं, तो अस्थायी कैश-फ्लो की दिक्कतों से जूझ रहे योग्य MSMEs को बड़ी राहत मिलेगी। यह कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों का हिस्सा है।

माइक्रोफाइनेंस और भविष्य के संकेत

CEA ने इसी के साथ माइक्रोफाइनेंस सेक्टर को लेकर भी चेतावनी जारी की है। उन्होंने एआई (AI) और डिजिटल माध्यमों से हो रही आक्रामक सेल्स और ओवर-लैंडिंग के खतरों पर चिंता जताई है। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि क्या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस सुझाव को स्वीकार करता है। यदि ऐसा होता है, तो बैंकों की एसेट क्वालिटी रिपोर्टिंग और प्रोविजनिंग नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.