Viswadeepthi Multi State Agri Co-operative Society में हुए कथित ₹65 करोड़ के डिपॉजिट स्कैम की जांच अब Central Bureau of Investigation (CBI) करेगी। केरला हाई कोर्ट के आदेश के बाद एजेंसी ने 335 मामलों की फाइलें अपने हाथ में ली हैं। याद रखें, यह कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है।
केरल हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद Central Bureau of Investigation (CBI) ने Viswadeepthi Multi State Agri Co-operative Society से जुड़े डिपॉजिट फ्रॉड मामले की कमान संभाल ली है। इस सोसाइटी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और अंतरराज्यीय संचालन के आरोप हैं।
जांच का दायरा
CBI की कोच्चि स्थित एंटी-करप्शन यूनिट ने 29 सितंबर, 2026 को इस मामले में FIR दर्ज की है। एजेंसी अब राज्य पुलिस और Economic Offences Wing द्वारा दर्ज किए गए 335 अलग-अलग क्रिमिनल केसों की फाइलों को एक साथ मिला रही है। ये शिकायतें मुख्य रूप से केरल और तमिलनाडु से आई हैं, जहाँ यह सोसाइटी अपना कामकाज चलाती थी।
कैसे फंसाया निवेशकों को?
आरोप है कि अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 के बीच सोसाइटी ने लोगों को 12% से 14.5% तक के भारी ब्याज का लालच दिया। हालांकि, जल्द ही डिपॉजिटर्स को डिफॉल्ट का सामना करना पड़ा और उन्हें न तो ब्याज मिला और न ही मूलधन। फिलहाल अनुमानित नुकसान ₹65 करोड़ आंका गया है, लेकिन ऑडिट के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है।
लिक्विडेशन और कानूनी स्थिति
सितंबर 2026 में सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज ने इस संस्था को बंद (Winding up) करने का आदेश दिया और एक लिक्विडेटर नियुक्त किया है। इससे पहले अगस्त 2025 में National Cooperative Development Corporation की एक इंस्पेक्शन में पता चला था कि सोसाइटी अपने रजिस्टर्ड पते से काम भी नहीं कर रही थी। अब CBI 11 बोर्ड सदस्यों और प्रमोटरों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसा कहां भेजा गया।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह समझना जरूरी है कि Viswadeepthi Multi State Agri Co-operative Society एक प्राइवेट कोऑपरेटिव संस्था है, जो शेयर बाजार (NSE या BSE) पर लिस्टेड नहीं है। इसे किसी भी सार्वजनिक कंपनी से न जोड़ें। यह मामला अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स के जोखिम को दर्शाता है, जहां लिक्विडेशन की स्थिति में निवेशकों का पैसा वापस पाना बहुत मुश्किल होता है।
