केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने Reliance Commercial Finance और Reliance Home Finance से जुड़े दिल्ली और मुंबई में 15 ठिकानों पर छापेमारी की है। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों ने बैंकों से लिए गए **27,337 करोड़ रुपये** से ज़्यादा की रकम को ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट कर दिया, जिससे सरकारी बैंकों और LIC को भारी नुकसान हुआ है।
फंड डायवर्जन का पूरा मामला
CBI की जांच के दायरे में 23 ऐसी कंपनियाँ हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने फंड ट्रांसफर करने का जरिया बनकर Reliance Commercial Finance और Reliance Home Finance के पैसों को Reliance ADA Group की दूसरी कंपनियों में भेजा। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पैसों की हेराफेरी से कई सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को करोड़ों का चूना लगा है। कुल मिलाकर सात दर्ज मामलों में यह घोटाला 27,337 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।
जांच का दायरा और पूर्व अधिकारी
सबूत जुटाने के लिए CBI की टीम ने Reliance Home Finance के पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO), Reliance ADA Group के पूर्व सेक्रेटेरियल हेड और फाइनेंस कंपनी के पूर्व चीफ ट्रेजरी कंसल्टेंट जैसे कई अहम पूर्व अधिकारियों के घर और दफ्तरों की तलाशी ली है। यह कार्रवाई मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट से इजाज़त मिलने के बाद की गई। बता दें कि CBI पहले भी 38 से ज़्यादा जगहों पर कार्रवाई कर चुकी है, जिसमें चार चार्जशीट फाइल की गई हैं और सात लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
कंपनी का पक्ष
अनिल डी. अंबानी के प्रवक्ता ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि वर्तमान FIR Reliance Capital Ltd. से जुड़ी है। प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि अनिल अंबानी नवंबर 2021 तक Reliance Capital के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चेयरमैन थे, जिसके बाद RBI ने कंपनी के बोर्ड को अपने हाथ में ले लिया था। प्रवक्ता ने किसी भी गलत काम के आरोपों का खंडन किया है।
फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है और निवेशक कानूनी कार्यवाही के नतीजों पर नज़र बनाए हुए हैं।
