CBI की रडार पर Reliance Telecom: ₹115 करोड़ के बैंक फ्रॉड का आरोप
केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने Reliance Telecom लिमिटेड और उसके पूर्व निदेशकों पर ₹114.98 करोड़ के बैंक फ्रॉड का गंभीर आरोप लगाते हुए जांच शुरू कर दी है। मुंबई में कंपनी के ठिकानों पर तलाशी भी ली गई है। यह मामला भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत पर आधारित है, जिसमें आरोप है कि 11 बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए ₹735 करोड़ के टर्म लोन में गलत तरीके से ₹114.98 करोड़ का नुकसान हुआ। CBI ने इस मामले में साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक कदाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। एजेंसी तलाशी के दौरान मिले सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि फंड के इस्तेमाल और कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाया जा सके।
पुराने वित्तीय विवादों का साया
यह जांच Reliance Group की पुरानी वित्तीय कमजोरियों को फिर से उजागर करती है। ग्रुप की एक अन्य कंपनी, Reliance Communications Ltd. (RLCM), जो पहले से ही कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया से गुजर रही है, की वित्तीय हालत चिंताजनक है। मार्च 2026 तक इसका मार्केट कैप ₹221 करोड़ था और शेयर की कीमत ₹0.83 पर ट्रेड कर रही थी। पिछले 6 महीनों में शेयर में 42.4% की गिरावट आई, जबकि 3 साल में इसने -22.87% का निगेटिव रिटर्न दिया। RLCM की ये परेशानियां Reliance Telecom लिमिटेड के वर्तमान मामले को और गंभीर बनाती हैं।
सेक्टर में तेजी, पर पुरानी कंपनियां परेशान
जहां एक ओर भारत का टेलिकॉम सेक्टर सरकारी नीतियों और 5G जैसी नई टेक्नोलॉजी के दम पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर Reliance Telecom जैसी पुरानी कंपनियों के वित्तीय विवाद सामने आ रहे हैं। सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही है, और Jio व Airtel जैसी कंपनियां एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं।
लेकिन, पिछले कुछ सालों में बैंकों के NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) और बैंक फ्रॉड के बढ़ते मामलों ने एक चिंताजनक माहौल बनाया है। ऐसे मामलों की जांच से न केवल कंपनियों की साख पर असर पड़ता है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी डगमगा सकता है, जिससे उनके लिए फंड जुटाना और मुश्किल हो जाता है।
Reliance Group पर लगातार शिकंजा
Reliance Group की अलग-अलग कंपनियों पर नियामक जांच का दबाव नया नहीं है। अनिल अंबानी को भी Reliance Communications से जुड़े एक पुराने SBI मामले में पूछताछ का सामना करना पड़ा था। RLCM का 2019 में इनसॉल्वेंसी में जाना ग्रुप के टेलिकॉम कारोबार की पुरानी वित्तीय समस्याओं का प्रमाण है।
Reliance Telecom लिमिटेड के खिलाफ यह ताज़ा जांच, जो एक बड़े बैंक कंसोर्टियम से जुड़ी है, पुरानी कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल उठाती है। नई और चुस्त कंपनियों के विपरीत, Reliance Telecom पर पुराने वित्तीय दायित्वों का बोझ अधिक हो सकता है। इससे यह मामला कर्जदाताओं और रेगुलेटर्स के लिए एक रेड फ्लैग साबित हो रहा है। CBI की FIR में पूर्व निदेशकों के साथ-साथ अज्ञात लोक सेवकों के नाम भी शामिल हैं, जो संभावित व्यापक प्रशासनिक और वित्तीय विफलताओं की ओर इशारा करते हैं।
आगे का रास्ता
भले ही भारतीय टेलिकॉम सेक्टर के लिए भविष्य उज्ज्वल दिख रहा हो, लेकिन Reliance Telecom जैसी कंपनियों को अपनी वित्तीय अनियमितताओं और जांचों के नतीजों का सामना करना पड़ेगा। सेक्टर की समग्र मजबूती शायद इन कंपनियों को सीधे तौर पर बचा न पाए। निवेशकों की नज़र अब इस बात पर है कि कंपनी इन गंभीर वित्तीय और नियामक चुनौतियों से कैसे निपटती है और क्या कोई सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।