IL&FS Energy Development Company के खिलाफ CBI ने **₹212 करोड़** के लोन फ्रॉड को लेकर जांच शुरू की है। आरोप है कि Canara Bank से मिले कर्ज का इस्तेमाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के बजाय गलत तरीके से किया गया।
CBI की छापेमारी और गंभीर आरोप
CBI ने इस मामले में क्रिमिनल केस दर्ज करते हुए मुंबई, दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि Syndicate Bank (जो अब Canara Bank का हिस्सा है) से रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए लिए गए फंड को दूसरी जगह डाइवर्ट किया गया। इस पूरी धांधली में बैंक को करीब ₹212 करोड़ का नुकसान हुआ है।
FIR में इन नामों का जिक्र
यह मामला IL&FS ग्रुप के 2018 के वित्तीय संकट से जुड़ा है। CBI की एफआईआर (FIR) में कंपनी के पुराने मैनेजमेंट से जुड़े कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें हरि शंकरन, रमेश चंद्र बावा, सुनील वाधवा, अनूप सेठ और अरुण कुमार साहा के नाम शामिल हैं।
वर्तमान मैनेजमेंट का रुख
गौर करने वाली बात यह है कि साल 2018 में कंपनी के डूबने के बाद, भारत सरकार ने एक नया बोर्ड नियुक्त किया था, जो फिलहाल कंपनी के कर्ज समाधान (Debt Resolution) की प्रक्रिया देख रहा है। जांच में नाम आने वाले लोग उस पुरानी टीम का हिस्सा थे, जिनका अब की मौजूदा मैनेजमेंट से कोई लेना-देना नहीं है। फिलहाल, CBI जब्त किए गए दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच कर रही है, ताकि धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।
