CBI ने Reliance Commercial Finance से जुड़े **₹6,229.54 करोड़** के कथित फ्रॉड मामले में 17 नए लोगों और संस्थाओं के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इसमें ग्रुप के टॉप अधिकारियों और बैंकों के कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप है।
मामला क्या है?
CBI की जांच के घेरे में आई Reliance Commercial Finance Ltd (RCFL) ने बाजार में सनसनी मचा दी है। एजेंसी ने मुंबई की एक विशेष अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, जिससे इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या अब 24 तक पहुंच गई है। जांच में आरोप है कि कंपनी ने कर्ज के तौर पर ली गई ₹6,229.54 करोड़ की भारी-भरकम राशि को Reliance ADA Group की अन्य कंपनियों में गलत तरीके से ट्रांसफर कर दिया।
प्रमुख अधिकारियों पर आरोप
चार्जशीट में ग्रुप के बड़े नामों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ झुनझुनवाला, सीएफओ (CFO) अमित बापना और कंपनी सेक्रेटरी रमेश शेनॉय शामिल हैं। CBI का आरोप है कि बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक जैसे सरकारी बैंकों के 6 अधिकारियों ने भी इस पूरी साजिश में कथित तौर पर साथ दिया, जिसके बाद इन पर क्रिमिनल कॉन्स्पिरसी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है।
बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों पर असर
यह जांच Reliance ADA Group की कुल 8 कंपनियों तक फैली हुई है, जिनमें Reliance Power, Reliance Communications और Reliance Infrastructure शामिल हैं। एजेंसी का अनुमान है कि इस पूरे मामले में बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स को कुल ₹9,280 करोड़ का नुकसान हुआ है।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो टॉप मैनेजमेंट का नाम आना ग्रुप कंपनियों के लिए बड़ा गवर्नेंस रिस्क है। वहीं, इन सरकारी बैंकों के लिए रिकवरी का संकट और गहरा सकता है। कोर्ट में चल रही इस कार्यवाही पर अब पूरे मार्केट की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि CBI ने अभी और भी खुलासे होने के संकेत दिए हैं।
