मुंबई की एक विशेष CBI कोर्ट ने PNB फ्रॉड मामले में आरोपी और नीरव मोदी के करीबी संदीप मिस्त्री की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ और आरोपी के फरार होने के जोखिम को देखते हुए यह कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट का कड़ा रुख
मुंबई स्थित विशेष CBI कोर्ट ने नीरव मोदी के करीबी सहयोगी संदीप मिस्त्री को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मिस्त्री के पहले के रिकॉर्ड को देखते हुए उसे जमानत देना जोखिम भरा हो सकता है। विशेष रूप से यह तथ्य सामने आया है कि मिस्त्री को दुबई से जबरन प्रत्यर्पण (extradition) के जरिए वापस लाया गया था, न कि उसने खुद सरेंडर किया था।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2018 में सामने आए इस घोटाले की कुल राशि ₹23,780 करोड़ से भी ज्यादा है। CBI का आरोप है कि मिस्त्री हांगकांग और दुबई में फर्जी कंपनियों का जाल बिछाकर 'लेटर ऑफ अंडरटेकिंग' (LoUs) जारी करवाने में मुख्य भूमिका निभाता था। इन LoUs का दुरुपयोग ही इस पूरे घोटाले की जड़ था।
सबूत मिटाने की साजिश
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मिस्त्री ने अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए हाई-टेक तरीके अपनाए थे। उसने 'panemail' और 'crickinfo' जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया, जिसमें मैसेज खुद-ब-खुद डिलीट हो जाते थे। इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों से बचने के लिए उसने फर्जी कंपनियों के डायरेक्टर्स को काहिरा (Cairo) तक भेज दिया था।
बैंकिंग सेक्टर पर असर
इस घोटाले ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसके बाद LoUs जारी करने की प्रक्रिया को ही पूरी तरह बंद कर दिया और बैंकों को 'लेटर ऑफ क्रेडिट' (Letters of Credit) जैसे पारंपरिक तरीकों पर लौटने को कहा। इस कदम का उद्देश्य बैंकों के इंटरनल कंट्रोल को मजबूत करना है।
आज पंजाब नेशनल बैंक के निवेशक इस मामले को एक सबक के रूप में देखते हैं। बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी बैलेंस शीट को सुधारने और इंटरनल ऑडिट प्रोटोकॉल को सख्त करने पर विशेष ध्यान दिया है। बाजार की नजरें अब भी बैंक की एसेट क्वालिटी और लोन ग्रोथ पर टिकी हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी चूक को रोका जा सके।
