CBI ने हरियाणा के ₹504 करोड़ के फंड हेरफेर मामले में तीसरी चार्जशीट दायर की है। इसमें 19 नए लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें IAS अधिकारी और बैंक कर्मी भी शामिल हैं।
हरियाणा में सरकारी फंड के दुरुपयोग के मामले में जांच एजेंसी CBI ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पंचकूला की विशेष अदालत में दाखिल तीसरी चार्जशीट में कुल 37 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें 6 वरिष्ठ IAS अधिकारी, 9 सरकारी कर्मचारी और बैंकों के 4 अधिकारी शामिल हैं।
घोटाले की चाल और जांच
जांच के मुताबिक, 'हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद' और 'पंचायत विभाग' के सरकारी फंड को अनधिकृत बैंक खातों में डायवर्ट किया गया था। CBI का आरोप है कि इन पैसों को IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की चुनिंदा शाखाओं में जमा कराकर शेल कंपनियों के जरिए कैश में बदल दिया गया।
बैंक और निवेशकों पर असर
इस पूरे मामले में IDFC First Bank ने पहले ही अपनी जवाबदेही पूरी कर ली है। बैंक ने रेगुलेटर्स को सूचित किया था कि उन्होंने मूलधन और ब्याज समेत करीब ₹583 करोड़ की पूरी राशि हरियाणा सरकार को चुका दी है।
आगे क्या?
हालांकि एक बैंक ने अपनी देनदारी चुका दी है, लेकिन वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों का नाम इस जांच में आने से संस्थागत कामकाज और इंटरनल कंट्रोल सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निवेशकों को अब इन बैंकों के मैनेजमेंट की तरफ से आने वाली नई कमेंट्री और रेगुलेटरी अपडेट्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में पेनल्टी या ऑडिट को लेकर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
