कानूनी शिकंजा और गहराया
नई दिल्ली: Reliance Communications (RCOM) और इसके चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ ₹2,223.17 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के आरोप में अनिल अंबानी और RCOM के खिलाफ एक नया आपराधिक मामला दर्ज किया है। यह मामला 2013 से 2017 के बीच हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) में RCOM, अनिल अंबानी और अज्ञात लोक सेवकों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
यह CBI की कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अनिल अंबानी पर शिकंजा कसने के समानांतर चल रही है। ED पहले ही अनिल अंबानी से पूछताछ कर चुकी है और उनके मुंबई स्थित आवास, जिसे 'Abode' के नाम से जाना जाता है, का ₹3,716.83 करोड़ की कीमत का प्रोविजनल अटैचमेंट (आस्थगित कुर्की) कर चुकी है। यह कुर्की RCOM से जुड़े मनी-लॉन्डरिंग (Money Laundering) की जांच का हिस्सा है।
इन्सॉल्वेंसी (Insolvency) प्रक्रिया पर असर
Reliance Communications, जो कभी एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी हुआ करती थी, 28 जून, 2019 से कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। कंपनी पर करीब ₹40,410 करोड़ का भारी कर्ज है, और 31 दिसंबर, 2025 तक ₹28,826 करोड़ से अधिक का डिफॉल्ट हो चुका है। CBI का यह नया मामला और ED की बढ़ती जांच RCOM की इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया के लिए बड़ी बाधाएं खड़ी कर रही हैं।
इससे लेनदारों (Creditors) के लिए रिकवरी (Recovery) की उम्मीदें और धूमिल हो गई हैं। पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे लेनदारों को अब लंबी कानूनी लड़ाइयों और समाधान योजनाओं में देरी का सामना करना पड़ सकता है। यह भी गौरतलब है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने पहले ही RCOM के लोन अकाउंट को 'फ्रॉड' (Fraud) घोषित कर दिया है। ED द्वारा RCOM से जुड़े विभिन्न मामलों में अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य ₹15,700 करोड़ से अधिक हो गया है।
विश्लेषकों की चिंताएं
- लगातार नियामक दबाव: CBI की धोखाधड़ी जांच और ED की मनी-लॉन्डरिंग जांच, अनिल अंबानी और उनके ग्रुप कंपनियों पर नियामक एजेंसियों के लगातार दबाव को दर्शाती है। ED की आक्रामक कार्रवाई ग्रुप के वित्तीय सौदों की गहराई से जांच का संकेत देती है।
- कठिन रिकवरी: RCOM के लेनदारों के लिए बड़ी राशि की रिकवरी की संभावना अब और कमजोर हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले ने टेलीकॉम स्पेक्ट्रम को कॉर्पोरेट संपत्ति के बजाय एक संप्रभु संसाधन के रूप में वर्गीकृत किया है, जिससे इन्सॉल्वेंसी मामलों में ऋण वसूली के लिए इसका उपयोग सीमित हो गया है।
- कंपनी के फंडामेंटल्स: RCOM की वित्तीय स्थिति गंभीर बनी हुई है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो नकारात्मक है, जो भारी नुकसान का संकेत देता है। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹257-274 करोड़ के आसपास है और शेयर 200-दिन मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो बाजार के कमजोर विश्वास को दर्शाता है।
- प्रबंधन का ट्रैक रिकॉर्ड: RCOM का इतिहास असफल रणनीतिक पहलों से भरा है, जैसे कि Aircel मर्जर का टूटना और Brookfield को टावर बिक्री का मामला, जो 2019 में दिवालियापन दाखिल करने का कारण बने। अनिल अंबानी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स के विफल होने का इतिहास और मौजूदा जांचें, कंपनी के भविष्य पर सवाल खड़े करती हैं।
आगे का रास्ता
अनिल अंबानी की नियामक एजेंसियों के साथ बढ़ती व्यस्तता और Reliance Communications के खिलाफ गहरे कानूनी मुद्दे, आने वाले समय में लंबी जांच और कानूनी कार्यवाही का संकेत देते हैं। CBI जांच और ED की कार्यवाही के नतीजे RCOM की इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण होंगे। लेनदारों को अभी और देरी का सामना करना पड़ सकता है, और संपत्ति वसूली की जटिलता पूर्व की असफल योजनाओं और स्पेक्ट्रम जैसे संपत्तियों के संबंध में बदलते नियामक नियमों से और बढ़ गई है।