विदेशी निवेशकों (FPIs और FIIs) के लिए टैक्स छूट का दावा करना अब और सख्त हो गया है। 19 अक्टूबर, 2026 से, सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करने वालों को अनिवार्य रूप से Form 173A भरना होगा, जिसमें विस्तृत डेटा देना जरूरी है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने विदेशी निवेशकों के लिए अनुपालन (Compliance) के नए नियम जारी किए हैं। 19 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होने वाले इस नियम के तहत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs), विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को इनकम टैक्स एक्ट की अनुसूची IV के तहत टैक्स छूट पाने के लिए Form 173A जमा करना होगा।
फॉर्म 173A की बारीकियां
यह फॉर्म दो हिस्सों में विभाजित है। पहले हिस्से में निवेशकों को अपनी डेमोग्राफिक जानकारी देनी होगी, जिसमें रेजिडेंस का देश, पैन (PAN), टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (TIN) और सेबी (SEBI) रजिस्ट्रेशन की डिटेल्स शामिल हैं। वहीं, दूसरे हिस्से में सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) के ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और ब्याज या कैपिटल गेन्स का सटीक ब्योरा देना अनिवार्य होगा।
अनुपालन में चूक पर जोखिम
सरकार का यह कदम फाइनेंशियल सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक काम का बोझ बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कागजी कार्रवाई या डेटा में थोड़ी भी गलती होती है, तो विदेशी निवेशकों को टैक्स बेनेफिट्स से हाथ धोना पड़ सकता है, साथ ही उन पर ब्याज का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
संस्थागत निवेशकों को अब अपने इंटरनल रिकॉर्ड-कीपिंग सिस्टम को अपडेट करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिपोर्ट किया गया डेटा उनके ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाता है।
