Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और Bank for International Settlements के लिए सरकारी सिक्योरिटीज पर टैक्स छूट का दावा करने के लिए 'Form 173A' को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम सरकारी कर्ज बाजार में विदेशी पूंजी की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
अब कैसे होगा टैक्स छूट का दावा?
CBDT के इस नए आदेश के बाद से विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड्स (Government Securities) से होने वाली कमाई पर टैक्स बेनिफिट्स लेने के लिए नए 'Form 173A' को भरना होगा। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसका मकसद ब्याज आय (Interest Income) और कैपिटल गेन्स (Capital Gains) की रिपोर्टिंग को एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट में लाना है।
फॉर्म में क्या-क्या देना होगा?
यह फॉर्म केवल बेसिक जानकारी तक सीमित नहीं है। निवेशकों को अपना Permanent Account Number (PAN), निवास का देश, और Securities and Exchange Board of India (SEBI) द्वारा जारी आधिकारिक रजिस्ट्रेशन डिटेल्स साझा करनी होंगी। इसके अलावा, निवेशकों को अपनी हर होल्डिंग के लिए International Securities Identification Number (ISIN) की जानकारी देनी होगी। इसमें ट्रेजरी बिल या राज्य सरकार के बॉन्ड्स जैसी विस्तृत जानकारी शामिल है। साथ ही, वार्षिक खरीद-बिक्री मूल्य और भारतीय रुपये में हासिल किए गए मुनाफे का ब्योरा देना अनिवार्य होगा, ताकि टैक्स विभाग के पास हर ट्रांजैक्शन का पुख्ता ऑडिट ट्रेल हो।
क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
यह अपडेट जून 2026 के उस ऑर्डिनेंस का विस्तार है, जिसने सरकारी सिक्योरिटीज पर टैक्स छूट दी थी। हालांकि इसका उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना था, लेकिन अब सरकार 'ओवरसाइट' (निगरानी) को मजबूत करना चाहती है। टैक्स विभाग इन नियमों के जरिए दावों में मौजूद अस्पष्टता को खत्म करना चाहता है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। अब विदेशी संस्थाओं के लिए समय पर यह फॉर्म जमा करना बेहद जरूरी हो गया है, वरना उनकी टैक्स-छूट का दर्जा खतरे में पड़ सकता है।
